हमारी इच्छा इतनी बलवती नहीं होनी चाहिए कि उचित-अनुचित की विवेक बुद्धि ही नष्ट हो जाए- श्रीमती ज्योति सोनी

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झाबुआ से राजेंद्र सोनी की रिपोर्ट

सत्यसाई सप्ताह में प्रतिदिन बह रही ज्ञान गंगा ।
झाबुआ । श्री सत्यसाई बाबा के 93 वें जन्मोत्सव के तहत श्री सत्यसाई सेवा समिति द्वारा सिद्धेवर कालोनी में छटवें दिन सत्यसाई बाबा द्वारा इच्छाओं के नियंत्रण के संबंध में दिये गये उपदे के बारे में बोलते हुए श्रीमती ज्योति सोनी ने कहा कि स्वभावतः मनुष्य अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना करता है। उसकी सर्वाधिक महत्वपूर्ण इच्छाओं में से एक है, धन और यश की इच्छा और उसे उपलब्करने के लिए वह प्रत्यन करता रहता है। साधारणतया मनुष्य के प्रत्येक कर्म के पीछे यही अंतःप्रेरणा होती है। सभी महान लोगों का भी यही अभिमत है कि सृष्टि लीला इच्छाओं और आकांक्षाओं से प्रेरित है। इच्छा रखना मनुष्य का स्वभाव है, परंतु इच्छित फल की प्राप्ति के लिए उसे अमर्यादित और अनैतिक ढंग से कभी भी न तो सोचना चाहिए और न ही कर्म करना चाहिए। मनोवांछित फल पाने के लिए हमारी इच्छा इतनी बलवती नहीं होनी चाहिए कि उचित-अनुचित की विवेक बुद्धि ही नष्ट हो जाए और हम उसे येन-केन-प्रकारेण पाने के लिए तत्पर हो उठें। इसे ही लोभ या लालच कहते हैं।
श्रीमती सोनी ने कहा कि लोभी व्यक्ति कभी भी सुखमय जीवन व्यतीत नहीं कर सकता है। सच्चे मनुष्य की अग्निपरीक्षा तो प्रलोभन से होती है। स्वभावतः मनुष्य अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना करता है। उसकी सर्वाधिक महत्वपूर्ण इच्छाओं में से एक है, धन और यश की इच्छा और उसे उपलब्ध करने के लिए वह प्रयत्न करता रहता है। साधारणतया मनुष्य के प्रत्येक कर्म के पीछे यही अंतःप्रेरणा होती। इस प्रकार अनैतिक इच्छा के वश मनुष्य क्रोध, काम, ईर्ष्या और अहंकार का शिकार भी हो जाता है। इच्छा का सर्वथा त्याग तो मुश्किल है, किंतु वह इतनी अधिक न बढ़ जाए कि हमारे सोचने-समझने के सामथ््र्य को समाप्त कर लोभवश अनैतिक कर्मों में लिप्त कर दे। मानवकी यही स्थिति पशुतुल्य कही जाती है। ऐसी इच्छा त्यागने योग्य है। मनुष्य के समस्त विकास और पतन में इच्छा का ही हाथ है। जहाँ एक ओर श्रेष्ठ और शुभ इच्छा विकास की तरफ यात्रा करती है, वहीं विवेक शून्य इच्छा पतन, पराभव की ओर अग्रसर होती है। किसी प्रकार के अभाव की अनुभूति मनुष्य के अंदर विफलता का भाव पैदा करती है और इसी कारण मनुष्य में उस वस्तु को पाने की कामना जागृत होती है। यही कामना मनुष्य की इच्छा कहलाती है।
श्री सत्यसाई बाबा के जन्मोत्सव सप्ताह में समिति द्वारा नाम संकीर्तन का आयोजन किया गया जिसमें सर्वधर्म भजनों की समिति सदस्यों द्वारा प्रस्तुति दी गई। नाम संकीर्तन के पचात महा मंगल आरती की गई तथा प्रसादी का वितरण किया गया । आज 23 नवम्बर को सिद्धेवर कालोनी में श्रीमती ज्योति सोनी के निवास पर प्रातः ओंकारम सुप्रभातम के बाद लक्ष्यार्चना का आयोजन किया तथा वनवासी आश्रम के बच्चों के बीच नारायण सेवा का आयोजन किया गया । सायंकाल 7.30 बजे से नाम संकीर्तन के बाद इतिहासविद् डा. के के त्रिवेदी द्वारा अवतार के प्राकट्य एवं मानव सेवा माधव सेवा विय पर प्रवचन देंगें । महामंगल आरती के बाद प्रसादी वितरण के साथ ही रात्री 9 बजे साई सप्ताह का समापन होगा ।
सलग्न- फोटो-

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