झाबुआ

कोटा से झाबुआ मतदान करने अपने गाँव आये रमेश डामोर और अन्य मतदाता =======================!दूसरे स्थानों पर काम करने वालों को मतदान के लिये बुलाने की पहल हुई कारगर

झाबुआ जिले के करडावद बड़ी के रमेश डामोर ऐसे हजारों मतदाताओं में शामिल हैं, जो काम के सिलसिले में जिले से बाहर थे, लेकिन मतदान के दिन 28 नवम्बर को अपने गाँव लौटे और मतदान किया। रमेश ने बताया कि उन्हें मतदान के दिन का वेतन सहित अवकाश मिला था और झाबुआ जिला प्रशासन द्वारा उनके नियोक्ता और उनसे मतदान करने के लिये अपने गाँव आने के लिये कहा गया था। इसी का परिणाम है कि उनके नियोक्ता ने उन्हें मतदान के लिये अपने गाँव आने की छुट्टी दी और छुट्टी के दिन का वेतन भी दिया। रमेश बताते हैं कि हम जैसे हजारों मतदाता मतदान के लिये अपने-अपने गाँव आये, जो राजस्थान और गुजरात के शहरों में मजदूरी कर रहे थे।
जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर, झाबुआ ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्यप्रदेश के निर्देश पर विधानसभा निर्वाचन-2018 में शत-प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करने के लिये जिले से बाहर गये मतदाताओं को मतदान के लिये वापस गाँव लाने के लिये विशेष पहल की। इसके लिये शासकीय सेवकों के 11 दलों का गठन किया गया, जिन्हें अक्टूबर माह में 16 से 22 अक्टूबर के बीच ऐसे स्थानों पर भेजा गया, जहाँ पर जिले के मजदूर कार्य कर रहे थे। इन दलों के अधिकारियों-कर्मचारियों ने झाबुआ जिले के मजदूरों और उनके नियोक्ता, कम्पनी, संस्थानों से चर्चा की। इसके बाद संस्थानों और नियोक्ताओं ने मजदूरों को मतदान के लिये घर जाने का वेतन सहित अवकाश दिया और मजदूरों ने भी मतदान के लिये अपने गाँव आने की सहमति व्यक्त की।
सनोढ़ गाँव के जामसिंह ने बताया कि उन्हें वेतन के साथ छुट्टी मिलने पर खुशी हुई और वह गुजरात से अपने गाँव सनोढ़ मतदान के लिये आये। ग्राम चोरमांडली के राकेश और कविता ने बताया कि उन्हें तो मालूम ही नहीं था कि 28 नवम्बर को मतदान है। झाबुआ जिले से आये अधिकारियों ने उन्हें बताया और वह मतदान करने आ गये।
झाबुआ जिले से बाहर काम कर रहे मतदाताओं को मतदान के लिये बुलाने की यह नवाचारी पहल कारगर रही और हजारों मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
कतार में खड़े नहीं होना पड़ा, बैठने की व्यवस्था थी
झाबुआ जिले में इस बार मतदान के लिये किये गये नवाचारों में क्यूलेस मतदान भी महत्वपूर्ण रहा। इसमें जिला प्रशासन द्वारा गुलाबी और पीले रंग के टोकन छपवाए गये। महिलाओं को गुलाबी रंग और पुरुषों को पीले रंग के टोकन देकर अपनी बारी का इंतजार कुर्सियों, खटिया आदि पर बैठकर करने को कहा गया। आफीसर्स कॉलोनी, झाबुआ की श्रीमती अनीता रामावत ने बताया कि उन्हें इस बार लाइन में मतदान के लिये खड़ा नहीं होना पड़ा। वह और उनके साथ के सभी लोग टोकन लेकर आराम से कुर्सियों पर बैठे रहे और नम्बर आने पर मतदान किया।
आदर्श मतदान केन्द्र में रहा उत्सव जैसा माहौल
जिले में बनाये गये आदर्श मतदान केन्द्रों पर उत्सव जैसा माहौल रहा। आदर्श मतदान केन्द्र पर रंग-बिरंगे गुब्बारे और मतदाताओं को बैठने के लिये आरामदायक कुर्सियों की व्यवस्था की थी। हेमेन्द्र व्यास, पुष्‍पक समीर ने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा मतदान केन्द्र पर की गई व्यवस्थाओं ने हमें उत्सव का एहसास कराया।
फलिया नू जात्रा अभियान रहा सफल
झाबुआ जिले में स्केटर्ड (बिखरी) बसाहट को ध्यान में रख मतदाताओं को घर-घर मतदान की जानकारी और ईव्हीएम एवं वीवीपेट से मतदान करने की प्रक्रिया को समझाने के दृष्टिगत फलिया नू जात्रा अभियान भी चलाया गया। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 4-4 वाहनों को मतदाता जागरूकता के नारों से सुसज्जित कर ईव्हीएम एवं वीवीपेट मशीन के साथ फलिया-फलिया में घर-घर पहुँचाया गया और मतदाताओं को जानकारी दी गई।

जिला निर्वाचन अधिकारी श्री आशीष सक्सेना द्वारा गांव-गांव फलीये फलीये जाकर मतदान हेतु आम जनों को प्रेरित भी किया गया | स्वीप गतिविधियों के अंतर्गत प्रचार-प्रसार किया गया |आमजन को मतदान के महत्व को समझाया गया |मतदान दलों को गुजरात सहित 11 अन्य जिलों में भेज कर मतदाताओं को जागरूक करने का प्रयास किया गया | जिले के 29 बस स्टैंड पर हब स्टेशन बना कर भी मतदान जागरूकता अभियान चलाया गया | इन सारे प्रयासों के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी आशीष सक्सेना ने पूरी टीम के साथ योजनाबद्ध तरीके से काम किया और इसका इसका परिणाम यह आया कि मतदान प्रतिशत बढ़ाने में झाबुआ प्रदेश में प्रथम पायदान पर रहा | जिसका संपूर्ण श्रेय जिला निर्वाचन अधिकारी की कार्यशैली और उनकी पूरी टीम को जाता है |

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Piyush Gadiya

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