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10वीं और 12वीं की परीक्षा में 85 फीसदी प्रश्न सरल पूछे जाएंगे

इंदौर. 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में इस साल से विद्यार्थियों के पास होने की राह और आसान हो जाएगी। अब हर पेपर में 85 प्रतिशत प्रश्न सरल और सामान्य श्रेणी के होंगे। कठिन प्रश्न 15 प्रतिशत ही पूछे जाएंगे। इसके लिए बड़े प्रश्नों को कम कर छोटे प्रश्नों की संख्या बढ़ा दी है। मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल ने पैटर्न बदलकर नया ब्लू प्रिंट जारी किया है। स्कूलों में इसी पैटर्न के अनुसार तैयारी चल रही है।10वीं और 12वीं की परीक्षा में 85 फीसदी प्रश्न सरल पूछे जाएंगे
नए पैटर्न के हिसाब से प्रत्येक विषय में दो-दो नंबर के पांच प्रश्न (कृषि विज्ञान आदि में चार प्रश्न) पूछे जाएंगे। इसके अलावा चार नंबर के प्रश्न भी बढ़ेंगे। छह और सात नंबर के बड़े प्रश्न घटाकर एक या दो कर दिए हैं। छात्रों के लिहाज से सबसे आसानी यह होगी कि 35 नंबर के प्रश्न ऑब्जेक्टिव (वस्तुनिष्ठ) और अति लघु उत्तरीय होंगे।
वस्तुनिष्ठ को छोड़कर अन्य सभी प्रश्नों में विकल्प भी रहेंगे, ताकि कोई प्रश्न का उत्तर नहीं आए तो परीक्षार्थी दूसरा प्रश्न हल कर ले। प्रश्नों की संख्या भी 21 से बढ़कर 24 हो जाएगी। हालांकि   हिंदी सामान्य, अंग्रेजी, संस्कृत में तीन-तीन अंक के प्रश्न भी पूछे जाएंगे। विज्ञान का पेपर 75 नंबर का होगा, इसलिए उसमें दो-दो नंबर के चार प्रश्न रहेंगे। हिंदी विशिष्ट, सामान्य, अंग्रेजी विशिष्ट, संस्कृत विशिष्ट, संस्कृत सामान्य में 10 नंबर के प्रश्न पूछे जाएंगे।10वीं और 12वीं की परीक्षा में 85 फीसदी प्रश्न सरल पूछे जाएंगे
मॉडल पेपर से होगी पढ़ाई : सरकारी स्कूलों में बेहतर रिजल्ट के लिए शिक्षा विभाग ने पहली बार विषयवार मॉडल पेपर उत्तर सहित तैयार कराए हैं। इन्हें जिले के सभी स्कूलों में भिजवा दिया गया। शिक्षकों से कहा गया कि वे इससे पढ़ाई करवाएं, ताकि बच्चे अच्छे नंबरों से पास हों। 
बहुत जरूरी हो तो ही अवकाश लें शिक्षक :   जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि १क्वीं-१२वीं की परीक्षा में दो महीने बचे हैं। ऐसे में बहुत जरूरी हो तो ही शिक्षक अवकाश लें। यदि किसी कारण लेना पड़े तो अतिरिक्त कक्षा लगवाकर पढ़ाई करवाएं। शिक्षकों से कहा गया कि वे कमजोर और होशियार बच्चों को चिह्नित करें। कमजोर पर खास ध्यान दें, ताकि वे पास हो जाएं।  इधर.. आंचलिक अधिकारी को जानकारी ही नहीं
उक्त परीक्षा का पैटर्न बदल गया है, मंडल की आंचलिक अधिकारी बेला देवर्षि शुक्ला को इसकी जानकारी ही नहीं है। उनका कहना है कि इस संबंध में आदेश नहीं आए हैं। हालांकि एजुकेशन पोर्टल और मंडल की वेबसाइट पर इस बदलाव की जानकारी आ चुकी है।
फायदे कम, नुकसान ज्यादा
परीक्षा पैटर्न बदलने के फायदे कम नुकसान ज्यादा है। फायदा यह कि ज्यादा से ज्यादा बच्चे पास होंगे, बड़े की जगह छोटे प्रश्न पूछेंगे। 40 नंबर के प्रश्न तो ऐसे होंगे जिनका उत्तर पाइंट-टू-पाइंट देना होगा। इससे बच्चों को लिखना कम होगा। पैटर्न बदलने के नुकसान ज्यादा है वह इसलिए कि ज्यादा बच्चे पास भी हो जाएंगे तो उसका फायदा क्या? क्या सिर्फ ज्यादा बच्चों को पास करना मकसद है? नहीं, वर्तमान में जरूरत क्वालिटी एजुकेशन की है, इससे वह नहीं मिलेगी।
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