भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा जिले के 302 परीक्षा केन्द्रों पर संपन्न, हजारो परीक्षार्थी हुए सम्मीलित

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झाबुआ। अखिल विष्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान मे आयोजित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा जिले के शहरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों की शेक्षणिक संस्थाओं मे शनिवार को संपन्न हुई जिसमे हजारो विद्यार्थी शामिल हुए। ।
        परीक्षा के जिला संयोजक ष्याम त्रिवेदी ने जानकारी देते हुए बताया की प्रदेष भर के साथ ही जिले मे भी षनिवार को भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा संपन्न हुई। जिसमे कक्षा 5 वीं से 12 वीं तक 8 स्तर के परीक्षार्थी सम्मीलत हुए। इसके लिए 302 परीक्षा केन्द्रो मे 22 हजार 437 विद्यार्थियों के लिए व्यवस्था की गई थी। साथ ही इसे सुचारू संपन्न कराने के लिए तहसील संयोजको की नियुक्तियां की गई थी। इसके लिए पेटलावद मे निलेष पालीवाल, थांदला मे अंतरसिह रावत, मेघनगर मे एमएल बसोड, रानापुर मे नरेन्द्र जोषी ओर झाबुआ मे दीपन त्रिवेदी को दायित्व सोंपे गए थे।

जिले के केन्द्रो की स्थिती
परीक्षा प्रभारी श्री विनोद जायसवाल ने बताया की गत वर्ष की तुलना मे इस वर्ष 3 हजार 402 परीक्षार्थी बढे है। जिले की पेटलावद तहसील मे 102 केन्द्रो पर 5 हजार 192 छात्रों ने परीक्षा दी। थांदला तहसील मे 56 परीक्षा केन्द्रों पर 4 हजार 182 परीक्षा मे शामिल हुए। मेघनगर तहसील मे 40 केन्द्रो पर 3 हजार 401, रानापुर मे 230 केन्द्रों पर 1 हजार 112 ओर झाबुआ तहसील के 64 केन्द्रो पर 7 हजार 511 परीक्षार्थी सम्मीलित हुए। जिले मे सर्वाधिक विद्यार्थी बालक उमावि रातीलताई से 520, कन्या उमावि से 502, ओर उत्कृष्ट विद्यालय से 412 सम्मिलित हुए। 

परीक्षा का उददेष्य
परीक्षा सचिव शंभुसिंह पुरोहित ने बताया की प्रतिवर्ष परीक्षा मे अधिक से अधिक विद्यार्थियों को सम्मीलित कर भारतीय संस्कृति से उन्हे रूबरू करवाना है। उन्होने बताया की परीक्षा का आयोजन वर्ष 1992 से सतत जारी है। जिसका उददेष्य विद्यार्थियों के सर्वागीण विकास ओर धार्मिक आध्यात्मिक, विज्ञान के प्रति रूझान लाना है। ताकी आने वाली पीढी अपनी संस्कृति की जानकारी रख सके।

माना आभार।
परीक्षा की जिला समिति द्वारा आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त मोहिनी श्रीवास्तव, विद्यालयों के प्राचार्यो, षिक्षक षिक्षिकाओं का परीक्षा मे सहयोग देने के लिए आभार व्यक्त किया है। परीक्षा के तैयारियों मे विनोद गुप्ता,एन पी गुप्ता, मनोज महावर, विनोद परमार, मोहन अचाले, विनोद एस्के का विषेष सहयोग रहा।

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