indore

आसाराम, जिस बूटी का उपयोग करते हैं उसके नाम ने आश्रम वाले-वैद्य को किया चकित

इंदौर दुष्कर्म के आरोप में जोधपुर जेल में बंद आसाराम ने जिस बीमारी का जिक्र किया था, आसाराम के अनुसार उस बीमारी के इलाज में पंचेड़ बूटी का उपयोग होता है।जिस बूटी का उपयोग करते हैं आसाराम, उसके नाम ने आश्रम वाले-वैद्य को किया चकितआसाराम की इसी पंचेड़ बूटी खोजने के लिए पंचेड़ आश्रम में आबकारी विभाग ने मंगलवार शाम दो घंटे तक छानबीन की। लंबी छानबीन के बाद भी यहां से पंचेड़ बूटी नामक दवा नहीं मिली। वहीं आसाराम की बीमारी के बारे में उनके बेटे नारायण साई ने कहा कि आसाराम बापू को जो बीमारी है उसे आयुर्वेद में अनंतवाड कहा गया है। उन्होंने कहा भले ही पुलिस अपनी जांच रिपोर्ट में ऐसी किसी बीमारी से इंकार करती रहे, लेकिन आसाराम बापू को यह काफी लंबे समय से है और उनका आश्रम और आयुर्वेद के कई अन्‍य चिकित्सकों की देखरेख में उपचार चल रहा है। गौरतलब है कि आसाराम ने कहा था कि उन्हें त्रिनाडी शूल की बीमारी है। सोमवार को जोधपुर न्यायालय में आसाराम ने खुद को त्रिनाड़ी शूल बीमारी से ग्रसित बताते हुए महिला वैद्य नीता और पंचेड़ बूटी नामक दवा जेल में लाने की अनुमति मांगी थी।पंचेड़ बूटी की तलाश में आबकारी टीम मंगलवार शाम 5.30 बजे जिले के पंचेड़ स्थित आसाराम आश्रम पहुंची। करीब दो घंटे तक तलाशी अभियान चला। पंचेड़ सरपंच गोपाल चौधरी भी साथ थे। सहायक जिला आबकारी एम.एल. मांद्रे ने बताया ऐसी चर्चा थी कि पंचेड़ बूटी मादक पदार्थ हो सकता है। आश्रम में इस नाम की कोई दवा नहीं है। यहां किसी तरह का मादक पदार्थ (अफीम-गांजा या अन्य) नहीं मिला है। टीम में सहायक जिला आबकारी अधिकारी के.एस. सिकरवार, आबकारी उपनिरीक्षक जितेंद्रसिंह चौहान, मल्लिका शिंदे, विजय मईड़ा, ओमप्रकाश वर्मा व 8 आरक्षक थे।आश्रम से जुड़े लोग भी चकित : आसाराम द्वारा पंचेड़ बूटी का जिक्र करने से पंचेड आश्रम से जुड़े लोग चकित हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर इनका कहना है ऐसी कोई बूटी पंचेड़ आश्रम में आज तक नहीं देखी।

बीमारी भी गलत : कोर्ट में आसाराम ने खुद को त्रिनाड़ी शूल नामक बीमारी से ग्रसित बताया है। आयुर्वेद में ऐसी कोई बीमारी नहीं है। शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेद कॉलेज उज्जैन के पूर्व प्राचार्य डॉ. श्यामलाल शर्मा ने बताया त्रिनाड़ी शूल नामक कोई बीमारी आयुर्वेद में नहीं हैं। शरीर में कई नाड़ी हैं। हो सकता है किसी तीन नाड़ी में दोष हो और उसे आसाराम के वैद्य ने त्रिनाड़ी शूल नाम दिया हो। डॉ. शर्मा वर्तमान में पं. डॉ. शिवशक्ति शर्मा आयुर्वेद कॉलेज रतलाम के प्राचार्य हैं।आश्रम के आसपास अफीम : पंचेड़ आश्रम के आसपास नौगांवा, पल्दूना, बारोड़ा, बड़ौदा गांव में करीब 50 से अधिक अफीम के पट्टे शासन ने जारी किए हैं। आसाराम के पुराने वैद्य अमृत प्रजापति पहले कई बार कह चुके हैं आसाराम अफीम के आदी हैं। चर्चा ये भी है कि कहीं अफीम से बनी किसी दवा को ही आसाराम पंचेड़ बूटी तो नहीं कहते। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है।                                                                                                     आसाराम समर्थकों ने पटवारी व मजूदरों पर किया हमला    मांगल्य मंदिर व जेवीएल (जयंत विटामिंस लिमिटेड) परिसर में फसल काटने गए पटवारी व मजदूरों पर मंगलवार शाम आसाराम समर्थकों ने हमला कर दिया। पुलिस के पहुंचने पर हालात काबू हुए। तहसीलदार ने आसाराम समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस को पत्र भेजा है। पटवारी कमलेश राठौर जेवीएल की जमीन खरीदने वाले लोगों व मजदूरों को लेकर मांगल्य मंदिर व जेवीएल परिसर पहुंचे थे। उन्होंने जिला प्रशासन के कब्जे की जमीन से सोयाबीन कटवाना शुरू की। आसाराम समर्थकों ने आपत्ति जताई। शाम 4 से 5 बजे के बीच मांगल्य मंदिर संचालक जयंतभाई पटेल की अगुवाई में 200 लोग पहुंचे। उन्होंने पटवारी व मजदूरों से मारपीट की। तहसीलदार वीरेंद्र कटारे की सूचना पर आईए थाने से बल पहुंचा और स्थिति संभाली। पटवारी ने अज्ञात लोगों के खिलाफ आवेदन दिया। तहसीलदार ने फसल की जानकारी के साथ पटवारी व मजदूरों पर हमले के संबंध में आईए थाने पत्र भेजा है। इसमें आसाराम समर्थक व मांगल्य मंदिर संचालक जयंत भाई पटेल व अन्य पर शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने व हमला करने का जिक्र किया है। घटना के संबंध में मांगल्य मंदिर व पंचेड़ आश्रम से जुड़े प्रफुल्ल भाई भट्ट से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव नहीं किया।पहुंचे समर्थक : फसल कटाई के विरोध व हमले की घटना में कानूनी पेंच फंसते देख आसाराम समर्थक व उनके कानूनी सलाहकार तहसील कार्यालय पहुंचे। उन्होंने तहसीलदार व अन्य अधिकारियों से बात की। इस दौरान दफ्तर के बाहर समर्थकों का हुजूम नजर आया।
तहसीलदार ने बनाया था पंचनामा : जेवीएल जमीन के अतिरिक्त मांगल्य मंदिर व उससे जुड़ी 21 हेक्टेयर जमीन का हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए तहसीलदार ने कुछ दिनों पूर्व ही पंचनामा बनाया था। उन्होंने जमीन को जिला प्रशासन के कब्जे में लेकर फसल की निगरानी का जिम्मा कुछ लोगों को सौंपा था। उन्होंने किसी ट्रस्ट अथवा व्यक्ति विशेष के कब्जे को अमान्य कर दिया था।
Show More

Pradeshik Jan Samachar

प्रादेशिक जन समाचार स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा मंच है। यहां विभिन्न समाचार पत्रों/टीवी चैनलों में कार्यरत पत्रकार अपनी महत्वपूर्ण खबरें प्रकाशन हेतु प्रेषित करते हैं ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Close