दिग्विजयसिंह सरकार ने आसाराम को मात्र एक रुपए सालाना लीज पर जमीन एक और चौंका देने वाला खुलासा

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इंदौर। आसाराम बापू के आश्रम की जांच में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। जिस जमीन पर आश्रम बना है वह पहले रीजनल पार्क के लिए आरक्षित थी। कुछ वर्ष पहले इस मामले में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) ने आपत्ति भी ली थी। अब प्रशासन ने आश्रम में मिले पक्के निर्माण की जांच के लिए टीएंडसीपी से जमीन से जुड़े सभी नक्शों की फाइल मांगी है। इन नक्शों व मंजूरियों को मौके पर जाकर मिलान भी किया जाएगा। जिला प्रशासन का जांच दल एक-दो दिन में अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप देगा।आसाराम को लेकर हुआ एक और चौंका देने वाला खुलासा, जानिए पूरा सच
जिला प्रशासन द्वारा बनाए गए तीन सदस्यीय जांच दल ने शनिवार को आश्रम की नपती की थी। इस दौरान पता चला कि आश्रम निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गई हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आश्रम को लीज पर मिली जमीन का एक बड़ा हिस्सा तालाब का था और इसका उपयोग रीजनल पार्क के लिए तय था।वर्ष 1993 में जमीन लीज पर लेने के लिए ट्रस्ट ने जब शासन को पत्र लिखा था तो उसमें जमीन का उपयोग आश्रम, ध्यान केंद्र के साथ ही महिलाओं लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण भी बताया था। इस पर मार्च व जून 1995 में टीएंडसीपी के अधिकारियों ने आपत्ति ले ली थी। उन्होंने शासन को पत्र लिखकर कहा था कि जमीन का उपयोग रीजनल पार्क है और यहां 250 फीट चौड़ी सड़क मास्टर प्लान में तय है।
आपत्ति के बाद बदल दिया था पत्र
1995 में टीएंडसीपी की आपत्ति के बाद आश्रम प्रबंधन ने शासन को दूसरा पत्र लिखा और कहा कि जमीन ग्रीनबेल्ट की है तो हम यहां केवल उद्यान व योग केंद्र ही बनाएंगे और कोई निर्माण नहीं करेंगे। इसके बाद शासन ने आश्रम को जनवरी 1998 में ग्राम लिम्बोदी व बिलावली की 6.859 हेक्टेयर जमीन लीज पर दे दी।                                                             लीज पर लेने के बाद मांगी थी छूट
यह भी पता चला है कि साल 2000 में आश्रम ने 1.8 हेक्टेयर जमीन पर निर्माण के लिए शासन से लीज की तीन शर्तो में छूट मांगी थी, इसमें पक्के निर्माण नहीं करने और भूमि उपयोग अन्य के लिए नहीं करने की शर्त प्रमुख थी।आसाराम को लेकर हुआ एक और नया चौका देने वाला खुलासा, पढ़िए ये खबरइस पत्र पर आगे क्या हुआ, इसकी खोज की जा रही है। आश्रम में हुए निर्माणों को लेकर लिम्बोदी गांव की तत्कालीन सरपंच अनुसूइया पटेल ने आश्रम को कई बार नोटिस भी दिए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।आसाराम को लेकर हुआ एक और नया चौका देने वाला खुलासा, पढ़िए ये खबर21 लाख की जगह एक रुपए सालाना लीज
प्रशासन ने साल 1997 में तत्कालीन संभागायुक्त को पत्र लिखा और सालाना लीज राशि 21 लाख रुपए बताई। चूंकि जमीन पारमार्थिक काम के लिए थी इसलिए नियमानुसार लीज में छूट देते हुए इसे 17 लाख रुपए होना बताया, लेकिन तत्कालीन दिग्विजयसिंह सरकार ने आसाराम को मात्र एक रुपए सालाना लीज पर जमीन दे दी थी।

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