कदम-कदम पर खामिया”मिड डे मील

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नई दिल्ली.बिहार के सारण जिले का मिड डे मील हादसा केंद्र व राज्य सरकारों के लिए बड़ी चेतावनी है। दरअसल इस योजना के तहत कई राज्यों में जो कुछ चल रहा है वह चौंकाने वाला है।

ऐसे चल रही लापरवाही

हरियाणा वर्ष 2013 के रिब्यू मिशन की रिपोर्ट में हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के पेहोवा ब्लॉक में 26 सितंबर 2011 को खाने में छिपकली गिरने का जिक्र करते हुए कहा गया है कि गाइड लाइन के विपरीत सेंट्रलाइज्ड किचन में खाना पकाकर गांव के स्कूलों में सप्लाई किया जा रहा था।
अभी भी कई स्कूलों में साफ-सफाई का ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कुछ स्कूलों को 6 हजार रुपए किचन डिवाइस के लिए दिए गए। जब केंद्र की टीम पहुंची और स्कूल प्रशासन से पूछताछ की तो उन्हें पता ही नहीं था कि पैसा किस काम के लिए है।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में केंद्र की टीम गई तो वहां भी साफ-सफाई की समस्या नजर आई। स्कूलों में हेल्थ प्रोग्राम प्रभावी नहीं था। केवल 59 फीसदी स्कूल मैन्यू के मुताबिक खाना दे रहे थे। सात फीसदी स्कूलों में छुआछूत की समस्या पाई गई। हालांकि तमाम स्कूल ऐसे भी थे जहां योजना अच्छी चल रही है।

राजस्थान – सुअर व कुत्ते घूम रहे

कोटा में ट्रांसपोर्टर अनाज की सप्लाई में गड़बड़ी करते हुए पाए गए। अन्नपूर्णा व अन्य सेंट्रलाइज्ड किचन के जरिए स्कूलों में खाना ठीक तरीके से नहीं पहुंचाया जा रहा है। किचन कम स्टोर का ठीक तरीके से उपयोग नहीं हो रहा है। कई स्कूलों में सुअर व कुत्ते घूमते हुए पाए गए।

मध्यप्रदेश – मानीटरिंग संस्थानों की अक्टूबर 2011 से मार्च 2012 की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने कहा है कि मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में पिपलोडा ब्लॉक में बच्चों ने कहा कि उन्हें आधा पका या फिर ओवरकुक चपाती मिलती है। डिंडोरी जिले में बच्चे और अभिभावक दोनों ने गुणवत्ता की शिकायतें की। 40 से 47 फीसदी स्कूलों में खाने की मात्रा भी कम पाई गई। रीवां,बडवानी,उमरिया,शिवपुर,इंदौर,,मंदसौर,धार में अनाज के बहुत कम उपयोग पर चिंता। मानीटरिंग ढांचा दुरुस्त नहीं।

गुजरात – 30 से 40 फीसदी स्कूलों में बच्चों का बॉडी मास इंडेक्स मानक के अनुरुप नहंी फिर भी कुकिंग कास्ट का ठीक से उपयोग नहीं। सरदार पटेल इंस्टीट्यूट आफ इकोनामिक्स एंड साइंस रिसर्च की रिपोर्ट ने कहा कि हर जगह दाल व सब्जी रेगुलर नहीं मिलती।

खामियां ऐसी-ऐसी

दिल्ली के स्कूलों में वर्ष 2011-12 के दौरान 514 स्कूलों के सैंपल लिए गए। करीब 95 फीसदी में केमिकल पैरामीटर जो खाने में पोषण तत्व की मौजूदगी बताते हैं,मानक के अनुरूप नहीं पाए गए।

पैसे का उपयोग ठीक से न होना,फंड का दुरुपयोग, एनजीओ की मनमानी जैसी समस्याओं की ओर भी केंद्र सरकार की रिपोर्ट में कई राज्यों का हवाला देते हुए किया गया है।

बिहार के भागलपुर में 15 फीसदी स्कूलों में खाना खराब पाया गया। नालंदा व गया के किसी भी स्कूल में कम्युनिटी शामिल नहीं।

योजना आयोग की चिंता

योजना आयोग ने ज्यादातर जगहों पर मिड डे मील में बुनियादी आधारभूत ढांचे की कमी का सवाल उठाते हुए इसे योजना की सफलता के लिहाज से निर्णायक मसला बताया। आयोग ने कहा कि ज्यादातर राज्य केंद्र सरकार की गाइड लाइन का पालन नही करते।

 

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