व्यापार

सुधारों की उम्मीद से बाजार हुआ रोशन

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। आर्थिक सुधारों के दूसरे दौर की संभावना को देखते हुए गुरुवार को देश के शेयर व मुद्रा बाजार में जमकर आतिशबाजी हुई। पेंशन में विदेशी निवेश को मंजूरी और बीमा क्षेत्र में इसकी सीमा बढ़ने की उम्मीदों से लबरेज निवेशकों ने शेयरों में चौतरफा लिवाली की। इससे बंबई शेयर बाजार [बीएसई] का सेंसेक्स 15 महीनों बाद फिर से 19 हजार के स्तर को पार कर गया। मुद्रा बाजार में रुपये ने भी दम दिखाया और यह डॉलर के मुकाबले 52 के स्तर से नीचे आ गया।
सेंसेक्स इस दिन 188.46 अंक की वृद्धि के साथ 19058.15 अंक पर बंद हुआ। इसी प्रकार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 56.35 अंक चढ़कर 5787.60 अंक पर पहुंच गया। यह इस सूचकांक का पिछले 18 महीने का उच्चतम स्तर है।
जानकारों के मुताबिक, छोटे व खुदरा निवेशकों ने बाजार में खूब खरीदारी की। बीमा, बैंक, पूंजीगत सामान व बिजली क्षेत्र की कंपनियों में निवेशकों ने खास दिलचस्पी ली। सेंसेक्स में पिछले चार कारोबारी सत्रों के दौरान 480 अंक की वृद्धि घरेलू अर्थव्यवस्था को कई तरह से प्रभावित करने वाली है। इससे सबसे ज्यादा खुशी वित्त मंत्रालय को है, जो सरकारी कंपनियों में विनिवेश कार्यक्रम को तेजी से लागू करने की मंशा रखता है। पिछले वित्त वर्ष शेयर बाजार की दुर्गति की वजह से अपेक्षित विनिवेश नहीं हुआ था। अब सरकार को लग रहा है कि विनिवेश से 30 हजार करोड़ रुपये हासिल करने का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। इस बात के संकेत पिछले दिनों वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने दिए। उन्होंने कहा था कि शेयर बाजार के सकारात्मक रुख को देखते हुए सरकार विनिवेश कार्यक्रम को तेज कर सकती है।
दमदार होता रुपया
रुपये में भी मजबूती का माहौल बना हुआ है। डॉलर के मुकाबले रुपया पिछले पांच सत्रों से मजबूत हो रहा है। इसके पीछे आर्थिक सुधारों के लिए उठाए जाने वाले कदमों को ही प्रमुख वजह बताया जा रहा है। रुपया पिछले पांच महीनों में पहली बार 52 के स्तर से भी नीचे आ गया। यह 42 पैसे मजबूत होकर 51.74 के स्तर पर बंद हुआ। इसका काफी सकारात्मक असर होगा। इससे सीधे तौर पर राजकोषीय घाटा कम करने में जुटी सरकार को मदद मिलेगी। रुपये की मजबूती की वजह से क्रूड [कच्चा तेल] आयात बिल कम होगा। सरकार पर पेट्रोलियम सब्सिडी का बोझ घटेगा। आम जनता को भी महंगे पेट्रोलियम उत्पादों से राहत मिलेगी। तेल कंपनियां पेट्रोल की कीमत घटाने पर विचार भी कर रही हैं।
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Pradeshik Jan Samachar

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