भावनात्मक विकास से नहीं होता तनाव

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सिटी रिपोर्टर -!- रतलाम
वर्तमान शिक्षा प्रणाली से केवल बौद्धिक और शारीरिक विकास होता है आध्यात्मिक या चारित्रिक विकास नहीं। यह बात मुनिश्री तत्वरुचि ‘तरुण’ ने अणुव्रत अभियान के तहत शुक्रवार को बरबड़ रोड स्थित संत मीरा कॉन्वेंट स्कूल में कही।
उन्होंने बताया व्यक्ति को सामाजिक और भावनात्मक रूप से रोज कोई न कोई समस्या होती है। कारण है भावनात्मक और आध्यात्मिक तौर पर विकास शून्य है। मुनिश्री ने विद्यार्थियों को अणुव्रत के बारे में बताने के साथ शांत और मन को स्थिर रखने के लिए ध्यान भी करवाया। विद्यार्थियों को दिमाग कंट्रोल में रखने के लिए छोटे-छोटे मेडिटेशन के गुण भी बताए।
बड़ा वह जिसका दिल बड़ा हो
मुनिश्री ने विद्यार्थियों को अणुव्रत लेते हुए ईमानदार रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया जीवन में ज्ञान से अधिक महत्व ईमान का है। विनम्रता से बढ़कर जीवन में कोई आचार नहीं है। बड़ा वह नहीं होता है जिसके पास धन-दौलत है, बड़ा वह है जिसका दिल बड़ा है। शुरुआत में स्कूल प्रबंध समिति की ओर से सरिता लोढ़ा, सोमेश्वर ताटके, मनोज लोढ़ा, नितिन जैन, जितेंद्र पाल, राजेश गुप्ता, श्वेता व्यास आदि ने मुनिश्री का स्वागत किया। तेरापंथ सभाध्यक्ष रोशनलाल कोठारी ने बताया शनिवार को अणुव्रत कार्यक्रम बाजना बस स्टैंड स्थित जैन स्कूल में होगा।

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