भ्रष्टाचार के आरोपी को 4 वर्ष का सश्रम कारावास

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झाबुआ- प्रथम अपर सत्र न्यायालय ए .ए. खान द्वारा प्रकरण क्रमांक 07 /2016 मे रेंजर गवली हटीला को आवेदक हीरा भूरिया ग्राम उमरी के खेत से मरे हुए मोर मिलने पर ₹25000 रिश्वत की मांग की | आवेदक द्वारा इसकी शिकायत लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक इंदौर को की गई | ट्रेप दल द्वारा आरोपी को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया | विवेचना पश्चात प्रकरण न्यायालय में पेश किया गया जहां पर माननीय न्यायालय द्वारा विचारण के दौरान साक्ष्यों पर विश्वास करते हुए 26 अक्टूबर 2018 को निर्णय पारित करते हुए आरोपी रेंजर गवजी हटीला को धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अपराध में 4 वर्ष का सश्रम कारावास व ₹5000 का अर्थदंड की सजा सुनाई |

जिला मीडिया प्रभारी राजेंद्र पाल सी अलावा ने बताया की दिनांक 06.12.2015 को आवेदक हीरा भूरीया पिता श्री नरसिंह भूरिया निवासी गा्रम उमरी जिला झाबुआ को अपने घर था उस दिन सुबह करीब 9 बजे आवेदक के खेत के बाजू में आवेदक ने नाकेदार राकेश बामनिया को घुमते देखा फिर उसके बुलाने पर आवेदक उसके पास गया तो उसने वहा पर आवेदक के खेत के पास मरे पडे चार मोर दिखाते हुए आवेदक को उनके बारे में पूछा कि यह मोर कैसे मर गये तो आवेदक ने कहा इस बारे में उसे कोई जानकारी नही है। उसे पता भी नही था कि मोर यहा पर मरे पडे है। नाकेदार के बताने पर आवेदक को पता चला है फिर आवेदक झाबुआ चला गया। शाम को जब आवेदक अपने घर पहुचा तो मौके पर आवेदक के पिताजी के साथ नाकेदार राकेश बामनिया और छोटा रेंजर हटीला साहेब भी थे। आवेदक के पहुचने पर छोटा रेंजर हटीला साहब आवेदक को मरे हुए मोरो को ध्यान रखने का कहते हुए नाकेदार राकेश को साथ लेकर वहा से चले गए तब आवेदक के पिताजी नरसिंह भूरिया ने बताया की नाकेदार राकेश ने उनके सामने मरे हुए मोरो का पंचनामा बनाया फिर शाम को करीब छः साढे छः बजे रेंजर साहब छोटा रेंजर हटीला एवं नाकेदार आए उस वक्त आवेदक और आवेदक का छोटा भाई भंवर मरे हुए मोरो की चौकीदारी कर रहे थे। फिर नाकेदार ने आवेदक और आवेदक के भाई भंवर के सामने मरे हुए मोरो का पंचनामा बनाया और थेला में चारो मरे हुए मोरो को लेकर जाते हुए छोटा रेजर हटिला ने कहा कल झाबुआ आकर मुझसे मिल लेना, तो दुसरे दिन आवेदक झाबुअ जाकर छोटा रेंजर हटिला से उसके सरकारी घर पर जाकर मिला तो उसने कहा तुम्हारे खेत मे मोर मरे हुए मिले है तुम्हारे खिलाफ केस बन जाएगा अगर केस से बचना चाहते हो तो तुम्हे मुझे खर्चा पानी देना पडेगा और बोला डॉक्टर की रिपोर्ट आने पर खर्चा बताउंगा। दिनांक 08.12.2015 को छोटा रेजर हटिला आवेदक को राजगढ नाके पर मिला व मामले को रफादफा करने बदले 25000/- रू मांगे आवेदक ने कहा इतने पैसे नही दे पाएगा दौ-तीन हजार रूप्ये दे सकता है। फिर अगले दिन आवेदक की छोटा रेजर हटिला से फोन पर बात हुई तो छोटा रेंजर हटिला बार-बार दबाव बनाकर रूप्ये आवेदक से मांग रहा था तो आवेदक ने काह कि वह आठ हजार रूप्ये दे सकता है, तो रेंजर हटिला ने कहा कि ठिक है अभी कितने है तुम्हारे पास तो आवेदक ने कहा अभी तीन हजार रूप्ये है तो हटिला ने काह कि ठिक है अभी तीन हजार रूप्ये दे दो बाकी पांच हजार रूप्ये कब दोगे तो आवेदक ने कहा की 2-3 दिन मे दे देगा। फिर आवेदक ने छोटा रेंजर हटिला के घर जाकर तीन हजार रूप्ये दिए एवं आवदेक ने कहा की 2-3 दिन में व्यवस्था कर के पाच हजार रूप्ये दे देगा। आवेदक छोटा रेजर को रिश्वत नही देना चाहता था तथा रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकडवाना चाहता था इसलिए आवेदक ने इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त इंदौर को दिनांक 10.12.2015 को लोकायुक्त कार्यालय इंदौर मे उपस्थित होकर टाईपशुदा आवेदन पत्र मय रिकार्डशुदा मेमोरी कार्ड श्रीमान पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त इंदौर को प्रस्तुत की।

ट्रेप दल द्वारा रिश्वत लेते रंगे हाथों पकडा |

ट्रेप की अग्रिम कार्यवाही के अंतर्गत दिनांक 11.12.2015 को ट्रेपदल समय 11.30 बजे राजगढ नाका झाबुआ पहुचा जहा आवेदक ने बताया की आरोपी ने राजगढ नाके पर स्थित अंग्रेजी शराब की दुकान पर बुलाया है। निरीक्षक श्री सतीश कुमार के निर्देश पर ट्रेप दल वहा पहुचा शराब दुकान के पास पार्श्वनाथ रेस्टोरेंट के बाहर आरोपी गवजी हटिला मिला आरोपी द्वारा रिश्वत की राशि मांगने पर आवेदक ने केमिकल लगे नोट आरोपी को दिये तभी ट्रेप दल ने आरोपी को रंगे हाथो गिरफतार कर लिया।
प्रकरण की सम्पूर्ण विवेचना के पश्चात् माननीय विशेष अपर सत्र न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) झाबुआ में पेश किया गया ।

सश्रम कारावास की सजा व अर्थदंड
माननीय न्यायालय द्वारा विचारण के दौरान आई साक्ष्यों पर विश्वास करते हुए माननीय विशेष अपर सत्र न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) झाबुआ द्वारा दिनांक 26.10.2018 को निर्णय पारित कर आरोपी गवजी हटिला को धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अपराध में 4 वर्ष का सश्रम कारावास तथा रू. 5000 अर्थदण्ड से तथा धारा 13(1)डी, सहपठित धारा 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अपराध में 4 वर्ष का सश्रम कारावास तथा रू.5000 अर्थदण्ड से दण्डित किया गया ।

प्रकरण में पैरवी श्री के.एस. मुवेल, उप संचालक (अभियोजन) झाबुआ द्वारा की गई।

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