RATLAM

सांसद गुमानसिंह डामोर के वाहन को जयस ने घेरा, बचाव में कलेक्टर के गनमैन को आई चोट

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जनजातीय गौरव दिवस भगवान बिरसा मुंडा जयंती पर मंगलवार को सांसद गुमान सिंह डामोर, रतलाम ग्रामीण विधायक दिलीप मकवाना और अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासकीय अधिकारी ग्राम बड़छापरा में बिरसा मुंडा प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में शामिल होने गए थे।

रतलाम। मंगलवार को ग्राम धराड़ में जयस कार्यकर्ताओं ने रतलाम सांसद गुमानसिंह डामोर के वाहन को घेर लिया व जमकर नारेबाजी करते रहे। अचानक हुए घेराव से सांसद के काफिले के साथ चल रहे पुलिसकर्मी भी सकते में आ गए। जैसे-तैसे घेरा तोड़कर वाहन को निकाला गया। इस दौरान कलेक्टर के गनमैन को भी चोट पहुंची।

जनजातीय गौरव दिवस भगवान बिरसा मुंडा जयंती पर मंगलवार को सांसद डामोर, रतलाम ग्रामीण विधायक दिलीप मकवाना व अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासकीय अधिकारी ग्राम बड़छापरा में बिरसा मुंडा प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में गए थे।

लौटते समय दोपहर करीब एक बजे ग्राम धराड़ में जयस कार्यकर्ता सांसद के काफिले के सामने आ गए। रतलाम के समीप निवेश क्षेत्र का विरोध करते हुए कार्यकर्ता नारेबाजी करने लगे। अचानक हुए प्रदर्शन से पुलिसकर्मियों ने सांसद को सुरक्षा घेरा देने की कोशिश की, लेकिन बल कम होने से वाहन को नहीं निकाल पाए।

करीब 20 मिनट तक घेराव के दौरान जयस नेता व कार्यकर्ता सांसद के सामने नारेबाजी करते रहे। सांसद डामोर वाहन में ही बैठे रहे। भीड़ में हुई झूमाझटकी से कलेक्टर के गनमैन को भी मामूली चोट आई है। इस दौरान कुछ भाजपा नेताओं, स्थानीय लोगों सहित कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने मोर्चा संभाला और समझाइश व सख्ती दिखाकर वाहन को बाहर निकलवाकर काफिले को रवाना किया।

बताया जाता है कि सांसद के विरोध को लेकर जयस ने पहले ही तैयारी कर ली थी। प्रदर्शन करने वाले कुछ नेताओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया है, लेकिन अभी पुष्टि नहीं की है। बिलपांक पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्रदर्शन के वीडियो फुटेज देखने के बाद संबंधितों पर प्रकरण दर्ज किए जाने की संभावना है।

विरोध करने वाले भारतीय संस्कृति के खिलाफ

बाद में सांसद डामोर ने कहा काफिले को घेरने के साथ ही पथराव भी हुआ। प्रदर्शन धीरे-धीरे हिंसक हो रहा था। पुलिस व प्रशासन को अब थोड़ा सख्त भी होना पड़ेगा। एसपी को जानकारी दी है। प्रदर्शन करने वाले किस संगठन से थे नहीं जानता, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति कमजोर करना व जनजातीय समाज को बदनाम करना था। निवेश क्षेत्र में एक भी किसान की जमीन नहीं ली जा रही है तो विरोध किस बात का।

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