झाबुआ – स्वास्थ्य विभाग में अधिकारी कर्मचारी की कार्यप्रणाली इन दिनों जनचर्चा का विषय बनती जा रही है । विगत दिनों हमने देखा कि स्वास्थ्य विभाग में मोबिलाइजेशन वाहनों की निविदा प्रक्रिया में विभागीय अधिकारियों कर्मचारियों की मनमानी उजागर हुई है अब पता चला है कि इसी विभाग में DPM और DAM सामग्री खरीदी के लिए बाहरी फर्म पर पूर्ण रूप से मेहरबान है और आर्थिक लाभ कमाने के हरसंभव प्रयास भी कर रहे हैं जो जांच का विषय है ।
जानकारी अनुसार स्वास्थ्य विभाग में DPM और DAM बाहरी फर्म या ठेकेदार को सामग्री सप्लाई के कार्योदेश जारी करने के लिए हरसंभव प्रयास करते हैं और विभाग में जेम पोर्टल के माध्यम से खरीदी भी फर्म विशेष से ही करते हैं । लगता है इस विभाग का जेम पोर्टल सिर्फ बाहरी फर्म की ही दरें स्वीकृत करता है या यूं कहें कि इस विभाग का जेम पोर्टल उस फर्म ने ही बनाया हो , जो हर सामग्री की दरें फर्म विशेष की हो । सूत्रों का कहना है कि हाल ही मार्च के महीने में DPM और DAM की मिलीभगत से करीब 30-50 लाख के आसपास की सामग्री या अन्य खरीदी दोनों कर्मचारियों की मिलीभगत से ही संभव हुई है । और वह भी जेम पोर्टल प्रक्रिया के माध्यम से । यह दोनो कर्मचारी मिलकर जेम पोर्टल को आधार बनाकर दुगूने या अधिक दामों में खरीदी कर रहे हैं और बाहरी फर्म को आर्थिक लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं और संभवतः हिस्सा भी लेने का प्रयास भी हो । यह जांच का विषय है कि मार्च माह में दोनों कर्मचारियों ने क्या सामग्री खरीदी और किस उद्देश्य के लिए । यह भी जांच का विषय है कि खरीदी गई सामग्री विभाग के स्टोर तक पहुंची है या नहीं । या DAM सिर्फ फर्म को भुगतान करने में ही व्यस्त रहता है । सूत्रों का कहना है कि जब से DAM की पदस्थापना झाबुआ में हुई है तब से ही उनकी कार्यप्रणाली जांच का विषय है। दोनों की कार्यप्रणाली से ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों कर्मचारी फर्म विशेष के लिए कार्य कर रहे हैं न की शासन प्रशासन के लिए । क्या शासन प्रशासन इस ओर ध्यान देकर दोनों कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर कोई जांच करेगा या फिर दोनों यूं ही मनमानी करते रहेंगे…..?