झाबुआ

राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ थांदला का प्रकट उत्सव कार्यक्रम संपन्न.

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थांदला ( वत्सल आचार्य धवल अरोड़ा कि कलम से)- राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ थांदला का प्रकट उत्सव कार्यक्रम स्थानीय नयापुरा हाट बाजर मे रविवार रात्रि 8बजे संपन्न हुआ । इस अवसरपर स्वयं सेवको द्वारा समता,दंड,सामूहिक गीत,पिरामिड,सामूहिक योग मुद्रा का प्रकटीकरण विभिन्न् गण द्वारा किया गया, साथ ही घोष कि करतल ध्वनि ने उपस्थित महानुभावो को मंत्र मुग़ध् कर दिया।

इस अवसर पर स्वयंसेवको द्वारा सामूहिक आध्य सर संघ चालाक प्रणाम किया गया।आयोजन मे सामाजिक धार्मिक राजनैतिक व्यवसाई बड़ी संख्या मे उपस्थित थे। 

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए विभाग बौद्धिक प्रमुख अधिवक्ता श्री वीरेंद्र जी पाटीदार द्वारा कहा गया कि विक्रम संवत 2082 पूरे विश्व मे प्रचलित केलेंडरो मे सब से प्राचीन व सटीक काल गणना है जिसकी शास्त्रोक्त प्रमाणिकता है जिसे आज पुरा विश्व स्वीकार कर रहा है।हमारी संक्रति सब से प्राचीन संस्कृति व सभ्यता है आवश्यकता है हमे अपने स्व को समझने कि सुनियोजित तरीके से भारत कि संस्कृति वैभव एवं विरासतो को आक्रांताओ द्वारा नस्ट किया गया व आजादी के पश्चात तथाकथित वामपंथी इतिहास कारो द्वारा गलत परिभाषित किया गया। परिणाम स्वरुप एक लम्बे कालखण्ड मे हमे हमारे स्व बोध से वंचित रखा गया जो हमारा था उसे भुला दिया गया।श्री पाटीदार ने आव्हान किया कि आनेवली सदी भरत कि है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष मे प्रवेश कर चुका है।संघ ने अपनी स्थापना से हिन्दुसमाज मे अपने स्व के जागरण का कार्य किया है। परमपुजय्नीय डॉक्टर हेडगेवर जी अपने बाल्यवस्था मे विद्यालय मे पड़ रहे थे तब अंग्रेज रानी विक्टोरिया के जन्मदिवस पर विद्यालय मे मिठाई वितरण किया गया था जिसे परम पूज्य डॉक्टर हेडगेवर जी ने विदेशी महारानी के जन्मदिवस कि मिठाई को अस्वीकार कर अपने सहपाठोयो को स्व का बोध करवाया था परिणाम स्वरूप उन्हे विद्यालय से निष्काषित किया गया था। हमारी संस्कृति हमारी सभ्यता पर गर्व करना प्रत्येक कार्यकर्ता को अपने स्वाभाव मे अपने परिवार मे पंच परिवर्तनो जिसमे सामाजिक समरसता,नागरिक कर्तव्यों का निर्वहन,परिवारिक कुटुंभ प्रबोधन,पर्यावरण के अनुकूल आचरणों को अपनाना व अपना भोजन,भ्रमण,भवन,भाषा और भूषा अपनी संस्कृति के अनुकूल आत्मसात करना है। यही हमारे शताब्दी समारोह कि सार्थकता है। कार्यक्रम मे सेवाभारती के जीतेन्द्र राठौड़ भी मंचासीन थे।

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