झाबुआ – जिले में अधिकारी कर्मचारी की कार्यप्रणाली को लेकर किस्से अब आम बात हो गई है । जहां कर्मचारी सरकारी नौकरी करते-करते अब रिश्तेदार के नाम से स्कूल का संचालन और रिश्तेदार के नाम से ही रामा ब्लॉक के विभिन्न स्कूलों में सामग्री सप्लाई कर , सप्लायर के तौर पर कार्य कर रहा है । यह कर्मचारी जिले में विभिन्न अधिकारी कर्मचारी के लिए रोल मॉडल हैं। जिसने अपनी कार्यशैली से यह दर्शाया है कि किस तरह सरकारी नौकरी भी कर सकते हैं और सप्लायर भी बन सकते हैं । वही इनकी प्रतिनियुक्ति की समय अवधि समाप्त होने के बाद भी डीपीसी का इन पर मेहरबान होना, जनचर्चा का विषय बन गया है । अजय यादव की इन्हीं कार्य प्रणाली को लेकर किसी आवेदक ने लोकायुक्त को लिखित रूप में शिकायत दर्ज कराई है जिसमें उसने झाबुआ में भंडारी पंप चौराहे के आगे एक बड़ी जमीन अपनी किसी मित्र की मां के नाम से खरीदी है और सरकारी नौकरी के साथ स्कूल संचालन तथा सप्लायर को लेकर जांच की मांग की है । यदि जमीन अपने किसी मित्र या अन्य व्यक्ति के नाम से खरीदी है तो उस मित्र की आय से अधिक संपत्ति को लेकर भी जांच की मांग की है । वही प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त होने के बाद भी इस ब्लाक में बने रहने के लिए किन किन अधिकारीयों ने इसका समर्थन किया है उस कार्यप्रणाली को लेकर भी जांच की मांग की है विशेष रूप से डीपीसी । यदि आवेदन के आधार पर जांच प्रारंभ होती है तो अजय यादव और उसके मित्र की आय से अधिक संपत्ति को लेकर जांच प्रारंभ हो सकती है । आवेदक का कहना है कि यदि सूक्ष्मता से इस कर्मचारी की कार्यप्रणाली और संपत्ति को लेकर की जावे , तो एक बड़ा मामला उजागर हो सकता है । वही आवेदक ने यह भी बताया कि इस कर्मचारी के रिश्तेदार की फर्म, जो रामा ब्लॉक में सामग्री सप्लाई करती है को लेकर सूचना के अधिकार अंतर्गत प्राप्त बिलों को जीएसटी विभाग से जांच के लिए आवेदन दिया जाएगा और बिलों में जीएसटी चोरी कै लेकर जांच की मांग की जायेगी । चूंकि किसी भी बिल में जीएसटी कटौत्रे को लेकर कोई स्पष्टीकरण नहीं है । देखना यह दिलचस्प होगा कि आखिर कब लोकायुक्त अपनी जांच प्रारंभ करेग और आखिर कब आवेदक जीएसटी विभाग को आवेदन देकर जांच की मांग करेगा ।