झाबुआ – जिले के पीएचई विभाग में बाहरी ठेकेदार का अजब खेल देखने को मिल रहा है । जहां सप्लायर द्वारा कार्योदेश में दिए आदेश अनुसार सामग्री का निर्धारित वजन के बजाय कम वजन की सामग्री सप्लाई की है और विभागीय अधिकारी द्वारा कमेटी बनाकर जांच तो की है लेकिन अब तक उसको लेकर खुलासा नहीं किया है । खरीदी जांच का विषय है ।
जानकारी अनुसार लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिक विभाग द्वारा हैंडपंप संधारण कार्य हेतु विभिन्न सामग्री की आनलाइन निविदा आमंत्रित की थी । जिसके अंतर्गत लेदर वायसर (CLMS) ,32 mm जी आय साकेट , हैंडपंप सुधार कार्य हेतु टी एंड पी और ब्राश स्लीव हेतु आनलाइन निविदा आमंत्रित की गई थी। किसी कारणवश टी एंड पी की निविदा निरस्त कर दी गई । वही ब्राश स्लीव जिसका वजन 450 ग्राम होना चाहिए , इस निविदा को निरस्त नहीं किया गया । इस निविदा में सबसे न्यूनतम दर वाली फर्म/ ठेकेदार को ब्राश स्लीव हेतु कार्योदेश जारी किया गया । तथा ठेकेदार या फर्म को 800 नंग ब्राश स्लीव विभाग को प्रदाय का आदेश दिया गया । लेकिन19 जुलाई को ठेकेदार/ फर्म संचालक मात्र 300 नंग ब्राश स्लीव विभाग को प्रदाय करने आया । वही पीएचई विभाग द्वारा इस सामग्री की गुणवत्ता व आदेश अनुसार सामग्री प्रदाय की जाने को लेकर कमेटी भी बनाई गई । जब विभागीय कमेटी द्वारा प्रदाय किए गए ब्राश स्लीव का वेरिफिकेशन किया गया, तो कमेटी ने पाया कि 450 ग्राम का ब्राश स्लीव प्रदाय न किया जाकर , मात्र 420 से 435 ग्राम के बीच निकला और एवरेज वजन करीब 425 ग्राम के आसपास निकला । सूत्रों का कहना है किब्राश स्लीव पूर्ण 450 ग्राम न होने पर रेट डिफरेंस होता है । और करीब यदि 20 से 25 ग्राम वेट डिफरेंस होने पर करीब 50 से 75 रू प्रति नंग का अंतर आता है । इस हिसाब से राशि में काफी अंतर आ सकता है । खैर ठेकेदार वर्तमान में 300 नंग ब्राश स्लीव विभाग में रखकर गया है और वजन भी निर्धारित मापदंड अनुसार नहीं है । वही निर्णय विभाग को लेना है कि निर्धारित मापदंड या वजन से कम वजन वाली सामग्री लेना है या नहीं । देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या पीएचई विभाग ठेकेदार के इस अजब खेल का क्या जवाब देते है या फिर विभाग इस कम वजन वाली सामग्री को पास आर्डर देते हैं । क्या विभाग के कार्यपालन यंत्री बाहरी ठेकेदार पर मेहरबान रहते हैं या फिर कम वजन के कारण आर्डर निरस्त करते हैं ।