झाबुआ

ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम का बनाया जा रहा मजाक

Published

on

झाबुआ —- जिले में ड्रग इंस्पेक्टर की मनमानी कार्यशाली के किस्से एक ओर जनचर्चा का विषय बनते जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर आरटीआई कार्यकर्ता को आवेदन के एवज में सही जानकारी नही देकर आवेदक को करीब 5 माह से गुमराह किया जा रहा है और तो और ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा कलेक्टर के निर्देशों का पालन भी नहीं किया जा रहा है।

जानकारी अनुसार कलेक्टर नेहा मीना द्वारा पूर्व के माह में  नारकोटिक्स एवं अन्य नशीली दावों के नियंत्रण एवं रोकथाम हेतु नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन की बैठक ली गई थी । जिसमें कलेक्टर द्वारा ड्रग इंस्पेक्टर को मेडिकल दुकानों की जांच किए जाने के निर्देश दिए गए थे । साथ ही किसी भी मेडिकल दुकानों पर बिना डॉक्टर की स्लिप के दवाई नहीं दिए जाने के निर्देश दिए गए थे ।‌ लेकिन ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा इन आदेशों का पालन आज दिनांक तक नहीं किया गया । जबकि इन मेडिकल दुकानों का नियमानुसार निरीक्षण किया जाए , तो कई खामियां देखने को मिल सकती हैं जैसे ड्रग लाइसेंस किसी और के नाम का और संचालन कोई और कर रहा है बिना डॉक्टर की स्लिप के दवाइयां दी जा रही है आदि अनेक खामियां निरीक्षण के दौरान देखी जा सकती है । लेकिन ड्रग इंस्पेक्टर की इन्हीं लचीली कार्यप्रणाली के कारण विगत दिनों एक दुखद घटना भी घटित हुई है ।

इसके अलावा एक आवेदक ने 20 जनवरी 2025 को नगर में संपूर्ण मेडिकल स्टोर के ड्रग लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन अंतर्गत संपूर्ण कागजी खानापूर्ति या दस्तावेज़ व नियमों की प्रकाशित प्रति की सत्य प्रतिलीपी , सूचना के अधिकार अधिनियम अंतर्गत मांगी था । ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा 15 फरवरी को पत्र के माध्यम से आवेदक को राशि जमा करने हेतु कहा गया । आवेदक ने 20 फरवरी को राशि जमा कर दी । लेकिन 20 फरवरी के बाद 5 माह बीत जाने के बाद भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इस दौरान आवेदक कई बार विभागीय कार्यालय पर भी पहुंचा । लेकिन ड्रग इंस्पेक्टर अपने कार्यालय पर नहीं थी । कई बार फोन कोल भी किए और वहाटसप मेसेज भी किया। लेकिन इस अधिकारी द्वारा कोई रिप्लाई नहीं किया गया । और जानकारी राशि जमा करने के बाद भी उपलब्ध नहीं कराई । वही इतने महीनों बाद 8 जुलाई को ड्रग इंस्पेक्टर ने आवेदक को जानकारी देने के लिए कार्यालय बुलाया और अधिकारी द्वारा गलत जानकारी देने का प्रयास किया, आवेदक ने गलत जानकारी लेने से इंकार कर दिया । वही ड्रग इंस्पेक्टर का कहना है कि ड्रग लाइसेंस से संबंधित सारी जानकारी आनलाईन है और इसलिए यह जानकारी देने में असमर्थ हूं । इस तरह ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम का मजाक बना रही है  इस तरह की तानाशाह पूर्ण कार्य प्रणाली को ध्यान में रखते हुए, आवेदक ने राज्य सूचना आयोग को इस शिकायत को लेकर गुहार लगाई है तथा शिकायत के माध्यम से ड्रग इंस्पेक्टर की कार्यप्रणाली को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच की बात कही है तथा सूचना के अधिकार अधिनियम अंतर्गत नियमानुसार पेनल्टी लगाने की मांग की बात कही है । क्या शासन प्रशासन इस और ध्यान देकर ड्रग इंस्पेक्टर की तानाशाह कार्य प्रणाली और कलेक्टर के निर्देशों का पालन न करने को लेकर, कोई उच्च स्तरीय जांच करेगा या फिर यह अधिकारी यूं ही मनमानी करती रहेगी……?

Trending