झाबुआ

संकल्प ग्रुप का पर्यावरण संरक्षण हेतु अभिनव अभियान
“मिट्टी के गणेश – पर्यावरण के लिए, संस्कृति के साथ”

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झाबुआ,

पर्यावरण संरक्षण को जीवन का संस्कार मानने वाला संकल्प ग्रुप झाबुआ पिछले कई वर्षों से निरंतर समाज में प्रकृति-संवेदनशीलता जागृत करने हेतु रचनात्मक और प्रभावशाली गतिविधियाँ संचालित कर रहा है। संस्था का उद्देश्य केवल पर्यावरण के प्रति चेतना फैलाना नहीं, बल्कि व्यावहारिक समाधान और जन-सहभागिता के माध्यम से सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन लाना भी है।
पॉलीथीन मुक्त समाज की दिशा में ठोस पहल

संकल्प ग्रुप द्वारा अब तक 150 से अधिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें बहनों को पॉलीथीन के विकल्प जैसे पेपर बैग, कपड़े की थैलियाँ, फ्रिज में उपयोगी पोटलियाँ और आकर्षक डिज़ाइनर बैग बनाना सिखाया गया। यह अभियान बहनों को न केवल पर्यावरण मित्र बनाता है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में भी अग्रसर करता है।

गणेशोत्सव – प्रकृति संग पावन पर्व

संकल्प ग्रुप ने जल संरक्षण और धार्मिक परंपराओं को आपस में जोड़ते हुए एक अनूठा अभियान शुरू किया है – “मिट्टी के गणेश जी” बनाने और घर पर ही स्थापना व विसर्जन का संकल्प।

यह कार्य केवल प्रतीकात्मक नहीं, व्यवहारिक भी है। हर वर्ष 5,000 से 7,000 तक मिट्टी की गणेश प्रतिमाएँ बनाकर उन्हें घरों, मंदिरों, विद्यालयों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से स्थापित व विसर्जित किया जाता है। इससे नदी-तालाबों में होने वाला प्रदूषण कम होता है और संस्कृति के मूल भाव सुरक्षित रहते हैं।
मिट्टी के गणेश बनाने की सहज प्रक्रिया और प्रशिक्षण

दिनांक 1 अगस्त 2025 को सेवाभारती केंद्र, झाबुआ में आयोजित प्रशिक्षण सत्र में बहनों को मिट्टी के गणेश जी बनाने की सरल विधि सिखाई गई। इस कार्य में विशेष बात यह है कि इसमें किसी प्रकार की लागत नहीं आती। आवश्यक सामग्री जैसे:

छानी हुई काली मिट्टी

रुई

हल्दी, कुंकुम, सिंदूर, अबीर, मेंहदी

चुना, लच्छा आदि


ये सभी वस्तुएँ घरों में आसानी से उपलब्ध होती हैं। केवल 5 मिनट में गणेश जी की सुंदर मूर्ति बनाई जा सकती है। प्रशिक्षकों द्वारा भाव-भंगिमा सहित मूर्ति निर्माण की तकनीक सिखाई जाती है, जिससे सहभागियों में कलात्मक आत्मविश्वास भी उत्पन्न होता है विस्तृत क्षेत्रीय कार्यक्षेत्र

पिछले वर्षों में यह प्रशिक्षण झाबुआ के अलावा थान्दला, मेघनगर, पेटलावद, राणापुर, पारा, अलीराजपुर सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों में भी सफलता पूर्वक आयोजित किया गया। इस वर्ष भी झाबुआ, थान्दला और पेटलावद में प्रशिक्षण के लिए सेवाभारती केंद्र के माध्यम से निःशुल्क पंजीयन प्रारंभ हो चुका है। इस अभियान में बच्चों, महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठजनों की भागीदारी देखी जाती है।
कार्य के लाभ – एक समग्र विकास की ओर

संस्था की अध्यक्ष श्रीमती भारती सोनी ने बताया कि यह कार्य केवल मूर्ति निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि इसमें व्यक्तित्व विकास की दृष्टि से भी अनेक लाभ समाहित हैं:

कलात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा मिलता है

एकाग्रता और संयम की साधना होती है

आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता के द्वार खुलते हैं

धार्मिक भावना और पर्यावरण चेतना का संगम होता है

बच्चों में संस्कृति के साथ सृजनशीलता का विकास होता है

इस अभियान मे विशेष रूप से सुनीता आचार्य, आशा त्रिवेदी, ज्योति त्रिवेदी, शारदा कुमावत, सुनीता अलावा, निर्मला गोयल, कृष्णा तिवारी, देवकन्या सोनगरा, सलोनी सोनगरा आदि का सहयोग रहा।
नवाचार और सहभागिता से संकल्प की सिद्धि

संकल्प ग्रुप का यह प्रयास अपने आप में एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण है, जिसमें परंपरा, पर्यावरण और प्रशिक्षण – तीनों का सुंदर समन्वय है। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रेरणा का आंदोलन बन चुका है, जो आने वाले वर्षों में जन-जन तक पहुँचे – यही संकल्प ग्रुप का उद्देश्य है।

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