झाबुआ – जैन धर्म में त्याग और तपस्या का विशेष महत्व है तथा त्याग और तपस्या के माध्यम से मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त किया जा सकता है। जैन धर्म में मासखमण तपस्वी वह साधक होते हैं जो लगातार एक माह (30 दिन) तक एकासन या उपवास करते हुए, विशेष नियमों और संयम के साथ तपस्या करते हैं। यह तपस्या अत्यंत कठिन और उच्च कोटि की मानी जाती है, क्योंकि इसमें केवल आहार-संयम ही नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म का भी शुद्धिकरण होता है ।
तपस्या की इसी कड़ी में झाबुआ के एक युवा सिद्धांत की मासखमण की तपस्या अब पूर्णता की ओर है । जिन शासन गौरव पूज्य गुरुदेव श्री उमेश मुनि जी म.सा अणु के शिष्य धर्मदास गणनायक पूज्य प्रवर्तक देव श्री जिनेंद्र मुनि जी म.सा की आज्ञानुवर्तनी महासती पूज्या श्री प्रज्ञा जी म.सा आदि ठाणा-5 के परम पावन सानिध्य में श्री संघ में तपस्याओं का ठाठ लग रहा है तपस्याओं के क्रम में शहर के 19 वर्षीय युवा सिद्धांत कटकानी मासखमण जैसी दीर्घ तपस्या कर रहे हैं आज उन्होंने 28 उपवास के प्रत्याख्यान लिए है। सिद्धांत ने अपनी तपस्या 12 जुलाई को प्रारंभ की थी । प्रतिदिन तपस्वी की साता पूछने और उनके इस दीर्घ तप की अनुमोदना करने के लिए श्री संघ के श्रावक श्राविका सभी, मंडल वार, नवयुवक मंडल, बालिका मंडल,अणु आराधना मंडल, चंदना बहू मंडल क्रमवार तप की अनुमोदना करने हेतु तपस्वी के निवास स्थान पर पहुंच रहे हैं । साथ ही तेरापंथ महिला मंडल भी तपस्वी के तप की अनुमोदना हेतु सिद्धांत के निवास पर पहुंची थी । वही जैन सोशल ग्रुप मैत्री के सदस्यगण भी तपस्वी की सुखसाता जानने के लिए एक साथ पहुंचे थे । मात्र 19 वर्ष की आयु में मासखमण जैसी कठोर तपस्या करने पर युवा तपस्वी सिद्धांत के तप की चारों ओर प्रशंसा भी हो रही है ।