झाबुआ

तपस्वी सिद्धांत कटकानी के तप की अनुमोदना का क्रम जारी

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झाबुआ – जिन शासन गौरव आध्यात्मिक योगी आचार्य प्रवर पूज्य गुरुदेव श्री उमेश मुनि जी म.सा अणु के शिष्य धर्मदास गणनायक श्री जिनेंद्र मुनि जी म.सा की आज्ञानुवर्तीनी पूज्या महासती साध्वी श्री प्रज्ञा जी म.सा के पावन सानिध्य में युवा तपस्वी सिद्धांत कटकानी के 31 उपवास मासक्षमण तप की तपस्या पूर्ण होने जा रही है । तपस्या की अनुमोदना में तपस्वी के निज निवास पर दोपहर मे जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ के पदाधिकारी तपस्वी का बहुमान और तप की अनुमोदना करने हेतु पहुंचे ।  बावन जिनालय मंदिर  के व्यवस्थापक संजय  मेहता के साथ सभी पदाधिकारी ने तपस्वी के तप का अभिनंदन किया । प्रतिदिन तपस्वी की साता पूछने और उनके इस दीर्घ तप की अनुमोदना करने के लिए श्री संघ के श्रावक श्राविका ,सभी मंडल वार, नवयुवक मंडल, बालिका मंडल,अणु आराधना मंडल, चंदना बहू मंडल के साथ ही तेरापंथ महिला मंडल के अलावा अन्य श्रावक श्राविकाएं भी क्रमवार तप की अनुमोदना करने हेतु तपस्वी के निवास स्थान पर पहुंच रहे हैं । अन्य समाजजन ने भी इस 19 वर्षीय तपस्वी के तप की  प्रशंसा भी की । तप अभिनंदन के इसी क्रम में तपस्वी के निज निवास पर रविवार रात 8:30 बजे अणु संस्कार पाठशाला के बच्चे और संचालक मंडल तपस्वी का बहुमान और अनुमोदना करने पहुंचे । पाठशाला के बच्चों ने बहुत ही सुंदर चौवीसी प्रस्तुत कर सिद्धांत के तप की अनुमोदना की । तपस्वी के तप की अनुमोदना और बहुमान को लेकर कार्यक्रम का आयोजन भी रूनवाल बाजार स्थित महावीर भवन पर 12 अगस्त को किया जाएगा ।

19 वर्षीय युवा का अद्वितीय मासक्षमण तप

तेरापंथ समाज अध्यक्ष मितेश गादीया ने कहा कि जैन धर्म में मासक्षमण तपस्या को अत्यंत दुर्लभ, कठिन और आत्मशुद्धि का सर्वोच्च साधन माना जाता है। एक माह तक प्रतिदिन उपवास व सामायिक करते हुए, मन, वचन और काया की पूर्ण संयमपूर्वक साधना करना कोई साधारण कार्य नहीं। आज के भोग-विलास और आकर्षण से भरे युग में, मात्र 19 वर्ष की अल्पायु में इस कठिन तपस्या का संकल्प लेना और उसे सफलतापूर्वक पूर्ण करना, वास्तव में अद्वितीय एवं प्रेरणास्पद है । बावन जिनालय मंदिर के व्यवस्थापक संजय मेहता ने कहा कि यह तप केवल शरीर की परीक्षा नहीं, बल्कि आत्मबल, धैर्य, अनुशासन और अडिग श्रद्धा का जीवंत उदाहरण है। ऐसे तपस्वी युवा, समाज में आत्मसंयम और आध्यात्मिकता की अमूल्य प्रेरणा देते हैं । हम गर्व से कह सकते हैं कि इस युवा ने धैर्य में हिमालय और संयम में समुद्र जैसी विशालता दिखाकर, जैन समाज के गौरव को बढ़ाया है ।

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