झाबुआ —- अंकुरम इंटरनेशनल स्कूल, झाबुआ (विश्वस्तरीय गुणवत्ता शिक्षा प्रदान करने वाला, ISO प्रमाणित CBSE स्कूल) में 78वां स्वतंत्रता दिवस “हर घर तिरंगा” अभियान एवं “विविधता में एकता” थीम के साथ बड़े ही उत्साह, गरिमा और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर को तिरंगे झंडों, गुब्बारों और रंगोली से सजाया गया, जिससे वातावरण में राष्ट्रप्रेम की लहर दौड़ गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता पूजन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। प्राचार्य डॉ. रितेश लिमये, संस्थापक डॉ. लोकेश दवे एवं निदेशिका महोदया ने विद्यार्थियों को प्रेरक संदेश देते हुए एकता, शांति और प्रगति के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। डॉ. लिमये ने कहा— “तिरंगा केवल तीन रंगों का ध्वज नहीं, यह भारत की आत्मा, अस्मिता और असंख्य बलिदानों का अमर प्रतीक है। जब यह ध्वज तुम्हारे हाथों में होता है, तो तुम पूरे राष्ट्र की उम्मीदों, संस्कृति और स्वाभिमान को थामे होते हो। इसे ऊँचा रखना, अपने भीतर भारत को ऊँचा उठाने जैसा है।”
तिरंगा रैली और रंगोली प्रतियोगिता: इस अवसर पर छात्रों द्वारा हाथों में तिरंगा लेकर भव्य तिरंगा रैली निकाली गई, जो विद्यालय से शहर के प्रमुख मार्गों—राजवाड़ा चौक, आज़ाद चौक, थांदला गेट, लक्ष्मीबाई मार्ग—से होती हुई पुनः राजवाड़ा चौक पर संपन्न हुई। रैली देशभक्ति नारों से गूंज उठी और शहरवासियों के बीच उत्साह का संचार किया। साथ ही “तिरंगा” थीम पर आयोजित रंगोली प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता से देश की विविधता और एकता को जीवंत रूप दिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भारत के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झलकियां रहीं। विद्यार्थियों ने पारंपरिक वेशभूषा में पंजाब का भांगड़ा, राजस्थान का घूमर, गुजरात का गरबा, हिमाचल का नाटी, महाराष्ट्र की लावणी, जम्मू-कश्मीर का रूफ और केरल का मोहिनीयट्टम जैसे लोकनृत्यों की शानदार प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों ने भारत की विविधता में एकता की सच्ची तस्वीर पेश की। प्लेग्रुप के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने “नन्हे मुन्ने राही हूं” गीत पर मनमोहक नृत्य किया, जबकि यूकेजी के बच्चों ने देशभक्ति कविता प्रस्तुत कर सभी का दिल जीत लिया।
विद्यालय प्रबंधन ने शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन न केवल राष्ट्रप्रेम जगाते हैं, बल्कि जिम्मेदारी, अनुशासन और समाज सेवा की भावना भी विकसित करते हैं। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती पलक इसरानी ने किया एवं आभार श्रीमती अंबिका कुम्भावत ने माना। कार्यक्रम का समापन ‘वंदे मातरम्’ और भारत माता की जयघोष के साथ हुआ।