झाबुआ। सकल जैन समाज के पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व 20 अगस्त से आरंभ होकर 27 अगस्त तक चलेंगे। इस दौरान समाजजन जप-तप एवं आराधना में लीन रहेंगे। इसी क्रम में श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में चातुर्मास अंतर्गत 20 से 27 अगस्त तक श्वेतांबर जैन श्री संघ द्वारा गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद् विजय हेमेन्द्र सूरीश्वरजी मसा के समुदायवर्ती एवं परम् विदुषी साध्वीश्री पुष्पाश्रीजी मसा की सुशिष्या पपू साध्वी श्री रत्नरेखाश्रीजी मसा आदि ठाणा-3 की पावनकारी निश्रा में 8 दिवसीय पर्यूषण पर्व विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मनाया जाएगा। जानकारी देते हुए श्वेतांबर जैन श्री संघ मीडिया प्रभारी रिंकू रूनवाल ने बताया कि बावन जिनालय में दैनिक आराधना कार्यक्रम में प्रातः 5.30 बजे राई प्रतिक्रमण एवं पोषध क्रिया, 6.30 बजे शक्रस्तव अभिषेक, 7 बजे से केशर पूजन, 8.30 बजे से आरती, 9 बजे से पोषध शाला भवन में प्रवचन, शाम 7 बजे से देवसी प्रतिक्रमण, रात्रि 8.30 बजे से आरती एवं रात्रि 9.10 से 10.15 बजे तक प्रभु भक्ति का कार्यक्रम होगा। जिसमें श्री संघ के सभी महानुभावों से अधिकाधिक संख्या में सम्मिलित होकर लाभ लेने हेतु अपील की है। इसके साथ ही पांचों जिनालय श्री ऋषभदेव बावन जिनालय, श्री नाकोड़ा पार्श्वनाथ मंदिर, दादावाड़ी गणधर मंदिर, दिलीप गेट स्थित महावीर बाग, कृषि उपज मंडी के सामने श्री गौड़ी पार्श्वनाथ मंदिर के साथ रंगपुरा जैन मंदिर पर भी प्रतिदिन समाजजनों के दर्शन-पूजन का क्रम चलेगा। इन दिनों में श्रावक-श्राविकाओं द्वारा विभिन्न जप, तप एवं आराधनाएं की जाएगी। अंतिम दिन संवत्सरी (क्षमापना) पर्व का आयोजन होगा। पर्यूषण पर्व का है विशेष महत्व श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता ने बताया कि पर्यूषण महापर्व जैन समाज का वर्ष में एक बार चातुर्मासकाल के दौरान आने वाला सबसे बड़ा पर्व है, इसलिए इसे पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व कहा जाता है। इन दिनों मंे बड़ी संख्या में समाजजन जप, तप, आराधना में लीन रहने के साथ संवत्सरी पर सभी जीवों से क्षमापना की जाती है। वर्षभर भूलवश हुई गलतीयों के लिए क्षमापना करने के साथ विशेष आयोजनों में समाजजनों की सहभागिता रहती है।