झाबुआ

तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी ने असंयम से संयम का मार्ग श्रेष्ठ बताया है- महासती प्रज्ञाजी

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तपस्वी – आरती कटारिया

झाबुआ – श्रमण भगवान महावीर देव ने चौथे आरे में जन्म लिया, श्रमण भगवान महावीर स्वामी को जन्म के समय मति ज्ञान, श्रुत ज्ञान, और अवधि ज्ञान की प्राप्ती हुई| श्रमण भगवान महावीर स्वामी को दीक्षा के समय मन पर्याय ज्ञान की प्राप्ति हुई |दीक्षा के उपरांत भगवान ने साढ़े बारह वर्ष कठोर तप साधना करी और भगवान को केवल ज्ञान, केवल दर्शन की प्राप्ती हुई और तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी तीनो लोक के सृष्टा बन गए| भगवान महावीर स्वामी ने अपनी दिव्य देशना से भव्य जीवो के लिए पावन जिनवाणी के माध्यम से असंयम से संयम का मार्ग श्रेष्ठ बताया है| आजकल जीव को असंयम मैं ज्यादा आनंद आता है | संयम मार्ग पर जाना उसे कठिन लगता है व्यक्ति को घूमने फिरने में ज्यादा सुख मिलता है दया संवर तपस्या आदि करना उसे बंधन लगता है |व्यक्ति को सांप से डर लग रहा है पर पाप से डर नहीं लगता है यदि व्यक्ति पाप से डरने लगे तो वह पाप करेगा ही नहीं उक्त वचन संयम उपवन वर्षावास हेतु वीराजीत पूज्या महासती प्रज्ञा जी महाराज साहब ने पर्युषण पर्व के पांचवें दिन धर्म सभा में कहे | साध्वी सौम्यप्रभा जी महाराज साहब ने स्तवन प्रस्तुत किया| साध्वी हितज्ञा जी महाराज साहब ने अंतगढ़दशासूत्र का वाचन किया और उसमे वर्णित पावन संयमी चारित्र आत्माओं के विषय में बहुत ही सुंदर विस्तृत विवेचन किया | प्रवचन के पश्चात विश्व शांति एवं मानव मात्र के कल्याण के लिए साध्वी मंडल की निश्रा में शांति धुन की गई|

तपस्या का क्रम जारी

पर्यूषण पर्व के दौरान तपस्या का क्रम जारी है। इसी तपस्या के क्रम में आरती अक्षय कटारिया ने 7 उपवास के प्रत्याख्यान लिए है । वही पर्यूषण पर्व के दौरान चल रही सामूहिक अठाई तप के क्रम में 15 तपस्वीयो ने आज 5 उपवास के प्रत्याख्यान लिए |

भगवान का जन्म वांचन किया

दोपहर में 2:00 बजे से रुनवाल बाजार स्थित महावीर भवन पर भगवान का जन्मवांचन पूज्या साध्वी जी के द्वारा किया गया, जन्मवांचन बड़े ही हर्षोल्लास के साथ भगवान के जय घोष के साथ हुआ | जन्मवांचन के पश्चात चंदना बहू मंडल एवं सोना कटकानी ने स्तवन प्रस्तुत किया| नवयुवक मंडल के द्वारा दो टीमें बनाकर अपने-अपने ड्रेस कोड में झाला वारणा का कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया

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