झाबुआ। दुनिया के सारे काम दिमाग से करो, लेकिन भक्ति दिल से करो इसका अर्थ है की जीवन के सभी कार्मों में तर्कसंगत सोच और समझदारी का उपयोग करें, जबकि ईश्वर या किसी उच्च शक्ति के प्रति श्रद्धा और विश्वास पूरी भावनात्मक निष्ठा और प्रेम से व्यक्त करें। यह बताता है कि तार्किक निर्णय और भावनात्मक भक्ति दोनों जीवन के अलग-अलग पहलुओं के लिए महत्वपूर्ण हैं, एक को दूसरे पर हावी नहीं होने देना चाहिए। उक्त उद्गार स्थानीय श्री विश्व शांति नवग्रह शनि मंदिर परिसर में श्री पद्मवंशीय मेवाडा राठौर तेली समाज द्वारा सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन व्यास पीठ पर विराजमान प्रख्यात कथा वाचक पं. विनोद शर्मा (भदवासा वाले) ने कहे। उन्होंने जीवन में सत्संग व शास्त्रों में बताए आदर्शों का श्रवण करने का आह्वान करते हुए कहा कि सत्संग में वह शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन को बदल देती है। उन्होंने कहा कि व्यक्तियों को अपने जीवन में क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा, संग्रह आदि का त्यागकर विवेक के साथ श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए। भागवत कथा के दौरान विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि हमे जो पसंद है वह काम मत करों, भगवान को पसंद है वह कार्य करों, तुम भगवान की पसंद बन जाओगे। उन्होंने भगवत कीर्तन करने, ज्ञानी पुरुषों के साथ सत्संग कर ज्ञान प्राप्त करने व अपने जीवन को सार्थक करने का आह्वान किया। कथा के दौरान संगीतमय भजनों की धुन पर श्रोता भाव विभोर हो गए। लाभार्थी परिवार का किया स्वागत श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन के लाभार्थी परिवार का कथा के अंत में स्वागत किया गया। लाभार्थी राजेश सागरमल आसरमा को मोतियों की माला, सिर पर पगडी और गले में गमछा डालकर समाज के कोषाध्यक्ष अजय रणछोडलाल राठौर और शंकरलाल राठौर द्वारा प्रतिक चिन्ह देकर लाभार्थी परिवार को सम्मानित किया गया। स्वागत समारोह के पश्चात लाभार्थी परिवार द्वारा भागवतजी की आरती कर प्रसादी का वितरण किया।