झाबुआ

साध्वी श्री निखिलशीलाजी के सानिध्य में पर्युषण पर्व के बाद भी आरती श्रीश्रीमाल मासक्षमण तप की ओर अग्रसर

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थांदला (वत्सल आचार्य मिलिंद कोठारी की रिपोर्ट)——– वैसे पर्युषण महापर्व के बाद बड़ी तपस्याओं के दौर पर प्रातः विराम सा लग जाता है। लेकिन थांदला नगर में आचार्यश्री उमेशमुनिजी के सुशिष्य धर्मदास गणनायक प्रवर्तक श्री जिनेंद्रमुनिजी म.सा.की आज्ञानुवर्तिनी साध्वी श्री निखिलशीलाजी, दिव्यशीलाजी, प्रियशीलाजी, दीप्तिजी ठाणा 4 के सानिध्य में पर्युषण महापर्व के बाद भी तपस्या का दौर जारी है। यहां तपस्वी आरती श्रीश्रीमार मासक्षमण की ओर अग्रसर है, जो सभी के लिए अनुकरणीय, प्रेरणादायी एवं अनुमोदनीय है। वे अपने जीवन के दूसरे मासक्षमण तप की ओर अग्रसर है।

27 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए

श्रीसंघ के अध्यक्ष प्रदीप गादिया व सचिव हितेष शाहजी ने बताया कि बुधवार को साध्वीश्री निखिलशीलाजी के मुखारविंद से तपस्वी आरती श्रीश्रीमार ने 27 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। श्रीश्रीमार अपने मासक्षमण तप लक्ष्य की ओर निर्बाध रूप से अग्रसर है। इनके अलावा कई अन्य आराधकों ने भी विविध तप के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। इधर दस तपस्वी उपवास से वर्षीतप और पांच तपस्वी एकासन से वर्षीतप की आराधना कर रहे है। प्रिया प्रफुल्ल तलेरा आयंबिल से लघु सर्वतों भद्रतप व सुनीता जितेन्द्र घोड़ावत एकासन से महासर्वतों भद्रतप की तपस्या कर रही है। स्नेहलता मोदी नीवी से वर्षीतप तथा चर्चिल गंग तथा तारिणी गंग एकासन से नवकार तप की तपस्या कर रहे है। वर्धमान नीवी लड़ियाँ में संगीता दिलीप पीचा 54 वीं लड़ी तथा अनुपमा मंगलेश श्रीश्रीमाल दसवीं लड़ी की आराधना चल रही है। वर्षावास में तेला व आयंबिल की लडी भी चल रही हैं जिसमे भी श्रावक श्राविकाएं उत्साहपूर्वक अपना नाम लिखवा रहे हैं ।

अब तक 80 धर्मचक्र और अन्य तपस्या पूर्ण

नवयुवक मंडल के अध्यक्ष प्रांजल लोढ़ा व सचिव प्रांजल भंसाली ने बताया कि यहां अब तक 80 सामूहिक धर्मचक्र, ग्यारह उपवास तीन, दस उपवास एक, नौ उपवास छ:, आठ उपवास 22, चार-चार उपवास के पारणे एक, मेरु तप दो, एकासन से सिद्धितप दो, एकासन से धर्मचक्र छह, वर्धमान नीवी तप 12, वर्धमान नीवी लड़ियाँ 6, पांच उपवास तीन, चार उपवास दो, बियासन से धर्मचक्र तप 1 सहित छोटी बड़ी कई तपस्याएं पूर्ण हो चुकी है।

नियमित आराधना में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे है

साध्वी वृंद के सानिध्य में चातुर्मास के चलते श्रीसंघ में विभिन्न आराधनाओं के साथ तपस्याओं का क्रम जारी है। ज्ञान, दर्शन, चारित्र एवं तप की विभिन्न आराधना में श्रावक-श्राविकाएं उत्साहपूर्वक भाग ले रहे है। प्रतिदिन राईय प्रतिक्रमण, प्रार्थना, व्याख्यान प्रात: 09 से 10 बजे तक, दोपहर में वाचनी एवं ज्ञान चर्चा, शाम को देवसीय प्रतिक्रमण, चौवीसी स्तुति आदि विविध धर्माराधनाएं हो रही है, जिसमें श्रावक-श्राविकाएं व बच्चे उत्साहपूर्वक आराधना कर रहे है।

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