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झकनावदा में शारदेय नवरात्रि की तैयारियां जोरों पर 1992 से अनवरत जारी है सार्वजनिक नवदुर्गा उत्सव का गरबा

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झकनावदा/पेटलावद (राजेश कांसवा)।
झकनावदा नगर का ऐतिहासिक सार्वजनिक नवदुर्गा गरबा पांडाल इस बार भी नवरात्रि महापर्व पर भक्तिमय माहौल में गूंजेगा। छात्रावास परिसर में तैयारियां पूरे जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। समिति अध्यक्ष राजेंद्र कुमार मिस्त्री ने बताया कि इस वर्ष आयोजन में कुछ नया करने की कोशिश रहेगी। इसके लिए विशेष रूप से धार जिले के गरबा स्पेशलिस्ट्स सिंगर्स को आमंत्रित किया गया है।

आयोजन की तैयारियों में उपाध्यक्ष नारायण पटेल, सचिव श्रेयांश वोहरा, कोषाध्यक्ष शुभम कोटड़िया, महामंत्री आर्यन मिस्त्री, संयोजक दुर्गेश लौहार (गोलू), शुभम राठौड़ सहित पूरी टीम तन-मन से जुटी हुई है।


लालटेन के उजाले से शुरू हुआ था गरबा

शिक्षक हेमेंद्र कुमार जोशी ने बताया कि 1992 में बिजली के अभाव में गरबे की शुरुआत लालटेन (चिमनी) के उजाले में की गई थी। आयोजन की समाप्ति के बाद माताओं-बहनों को लालटेन की रोशनी में सुरक्षित घर तक छोड़ने की व्यवस्था की जाती थी।
तब से यह आयोजन निरंतर एक ही स्थान पर होता आ रहा है और इस वर्ष 33वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है।

आयोजन के प्रमुख सूत्रधार

हर साल इस आयोजन की सफलता में संरक्षक मनोहरसिंह राठौड़ (सेमलिया), शांतिलाल कांसवा, निर्मला निनामा (बहनजी), संतोषदेवी अरोड़ा, श्रीराम शर्मा, नेहा पडियार, नीना पडियार, मोनू सोलंकी, नैना मिस्त्री, भाजपा मंडल अध्यक्ष जितेंद्र राठौड़, ठाकुर परीक्षितसिंह राठौड़, समाजसेवी नरेंद्र कोठारी, प्रदीप कुमार पालरेचा, प्रदीपसिंह राठौड़ (तारखेड़ी), श्रेणीक कोठारी, पूर्व सांसद प्रतिनिधि राजेश कांसवा, मनीष कुमट, हरिराम पडियार, प्रकाश राठौड़, संजय व्यास, नरेंद्र खुडवेल, व्यापारी हरीश सोनी, गौरव अग्रवाल, फकीरचंद माली सहित अन्य वरिष्ठजनों का विशेष सहयोग रहता है।


स्वयंसेवकों की निस्वार्थ सेवाएं

गरबा पांडाल की सफलता में प्रतिवर्ष कई युवा और समाजसेवी अपनी सेवाएं देते हैं। इनमें प्रमुख रूप से गोपाल मिस्त्री, धर्मेंद्र मिस्त्री, रौनक भानपुरिया, पंकज राठौड़, पं. विकास जोशी, नारायण राठौड़ (पान वाले), पं. संजय व्यास, नारायण प्रजापत, कमलेश पडियार, धीरज चौयल, कुणाल कांसवा (पांडाल प्रभारी), ऋषि प्रजापत (इलेक्ट्रीशियन), पीयूष राठौड़ (मीडिया प्रभारी), विनोद प्रजापत, मनीष प्रजापत, बादल प्रजापत, हेमेंद्र राठौड़, नयन राठौड़, उदयसिंह गामड, डॉ. अंतिम चौधरी, घनश्याम कनालची आदि नाम शामिल हैं।


यह आयोजन आज भी शासन की गाइडलाइन के अनुरूप पूर्णतः नियमानुसार संचालित किया जाता है, जिसमें नगर व आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के हजारों भक्त बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं और हर दिन लाभार्थियों द्वारा स्वल्पाहार, फलाहार खिचड़ी व केसर दूध का वितरण किया जाता है।

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