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अतिवृष्टि से झकनावदा क्षेत्र में किसानों की फसल बर्बाद, मुआवजे की मांग

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झकनावदा/पेटलावद (राजेश कासवक):
हाल ही में झकनावदा और आसपास के क्षेत्रों में हुई अतिवृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। किसानों की सोयाबीन और मक्का की फसलें भारी नुकसान की झेली हैं। फसलें छोटी और कमजोर हो गई हैं, जिससे उत्पादन न के बराबर रहने की संभावना जताई जा रही है।

किसानों ने बताया कि लगातार बारिश और ओलों के कारण फसलें प्रभावित हुई हैं। कई क्षेत्रों में सोयाबीन पूरी तरह पीली पड़ गई है और मक्का की फसल भी खराब हुई है। किसानों ने सरकार से उचित मुआवजा देने की मांग की है, लेकिन अब तक फसलों का सर्वे नहीं किया गया है।

किसानों की प्रतिक्रिया:

मोतीलाल चौधरी, झकनावदा: “मेरी करीब 25 बीघा जमीन में बोई सोयाबीन फसल अतिवृष्टि के कारण पीली पड़ गई और भारी नुकसान हुआ। जल्द सर्वे कर उचित मुआवजा मिलना चाहिए।”

नानूराम कामलिया: “मेरे 7 बीघा मक्का की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है।”

बादर खराड़ी, ग्राम बोरिया: “मेरी 6 बीघा सोयाबीन की फसल छोटी रह गई, फल नहीं आए।”

गोविंद मेड़ा, झकनावदा: “सोयाबीन, हरा धनिया और टमाटर की फसल नष्ट हो गई, भारी नुकसान हुआ है। सरकार से मुआवजे की उम्मीद है।”

रणछोड़ मेड़ा, ग्राम भेरूपाड़ा: “ग्राम पंचायत भेरूपाड़ा के कई किसानों की सोयाबीन और अन्य फसलें भी प्रभावित हुई हैं।”


सरकारी प्रतिक्रिया:
उप तहसीलदार झकनावदा, विजेंद्र कटारे ने कहा कि जल्द ही टीम गठित कर किसानों के खेतों में जाकर फसलों का मुआयना किया जाएगा और नुकसान का जायजा लिया जाएगा।

किसानों का कहना है कि केवल मंच से घोषणाएं करना पर्याप्त नहीं है। वे चाहते हैं कि वरिष्ठ अधिकारी खेतों में आकर वास्तविक स्थिति देखें और समय पर उचित मुआवजा प्रदान करें।

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