झाबुआ – शहर के बावन जिनालय मंदिर में शाश्वत नवपद ओलीजी की आराधना का कम्र जारी है । यह तप आत्मा को शुद्ध करने और कर्म बंधनों से मुक्ति दिलाने का एक तरीका माना जाता है। यह जैन समाज में आध्यात्मिक उन्नति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र पर्व है ।यह तप शाश्वत माना जाता है और आत्मा के कल्याण तथा मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है । इस नवपद ओलीजी के लाभार्थी प्रकाशचंद कटारिया एवं परिवार है ।
नवपद ओली आराधना, जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है । इसे आयंबिल ओली के नाम से भी जाना जाता है। यह नौ दिन तक चलने वाला महत्वपूर्ण तपस्या पर्व है। दीपावली, होली, पर्यूषण आदि पर्व साल में एक बार आते हैं लेकिन शाश्वत सिद्धचक्र नवपद ओली जी साल में दो बार चैत्र मास व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है । अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय , साधु, ज्ञान, दर्शन, चरित्र और तप की साधना ही नवपद ओली आराधना का सार है यह आराधना कर्मों की निर्जरा तथा शारीरिक व्याधि को दूर करती है। नवपद ओली जी का तप आयंबिल से किया जाता है ओली तप में आराधक एक बैठक पर एक समय भोजन करता है उसमें भी पानी उबला हुआ व भोजन रुखा अर्थात तेल- घी, मिर्च -मसाले, नमक -शक्कर, दूध-दही, आदि रहित या स्वादहीन भोजन करता है इस दौरान आराधक सुबह उठकर भक्तांबर पाठ, सामायिक , पूजन, प्रवचन श्रवण तथा दोपहर को देव वंदन व संध्या प्रतिक्रमण तथा निर्धारित माला जाप करता है। इसी कड़ी में भी झाबुआ में भी नवपद ओली की आराधना 29 सितंबर को प्रारंभ हुई व 8 अक्टूबर को ओली जी की आराधना पूर्ण होगी तथा सामूहिक रूप से पारणा आयोजित होगा । शहर के बावन जिनालय मंदिर में नवपद ओलीजी का आयोजन किया जा रहा है इस नवपद ओली में महिलाएं व पुरुषों ने इस तप को किया है । इस तप अनुसार सभी तपस्वियों ने सुबह उठकर पूजन-पाठ, प्रवचन श्रवण तथा संध्या में प्रतिक्रमण किया गया । इस संपूर्ण नवपद ओली जी के नव दिन के लाभार्थी प्रकाशचंद ,पूर्वेश व पीयूष कटारिया परिवार है ।