कट्ठीवाड़ा। ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की हकीकत उस समय उजागर हुई जब मंडल अध्यक्ष जयराजसिंह ठाकुर एवं शिक्षा समिति अध्यक्ष मुकेश भूरिया ने ग्राम पंचायत राठोड़ी, काबरिसेल, कदवाल एवं करेली मऊड़ी के स्कूलों का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकांश विद्यालय बंद पाए गए।
श्री ठाकुर ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार यह शिकायत मिल रही थी कि स्कूल नहीं खुलते। इसी के चलते चार पंचायतों के स्कूलों का निरीक्षण किया गया, जिनमें — प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय खेड़ा फलिया कदवाल, प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय सड़ाडी फलिया कदवाल, प्राथमिक शाला तोहलिया फलिया राठोड़ी, प्राथमिक शाला गलु फलिया कदवाल, प्राथमिक शाला सालमपुरा कदवाल — सभी बंद पाए गए।
ग्रामीणों ने बताया कि इन स्कूलों में शिक्षक नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते, जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है। श्री ठाकुर ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षा का स्तर सुधारने पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं, लेकिन जब शिक्षक ही स्कूल नहीं पहुंचेंगे, तो शिक्षा व्यवस्था कैसे सुधरेगी।
शिक्षा समिति अध्यक्ष मुकेश भूरिया ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन पंचायतों में कई शिक्षक अपनी दुकानें चलाने में व्यस्त रहते हैं और स्कूलों में ताले लटके रहते हैं। उन्होंने बताया कि “कई बार सरपंच दिलुभाई कदवाल ने इन व्यापारी शिक्षकों की शिकायत अधिकारियों से की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती।”
भूरिया ने यह भी आरोप लगाया कि सीएससी स्तर पर अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में भी मनमानी की जा रही है।
जब इस संबंध में कट्ठीवाड़ा खंड स्रोत समन्वयक (BRC) शैलेन्द्र डावर से बात की गई, तो उन्होंने कहा — “मैंने शिक्षकों को स्कूल जाने के निर्देश दिए हैं, परंतु कई बार वे नहीं जाते। मेरे पास 350 से 400 स्कूलों की जिम्मेदारी है। जिला बैठकों, कार्यालय और ऑनलाइन कार्यों के कारण निरीक्षण सीमित रह जाता है। महीने में 10 से 12 स्कूलों का निरीक्षण करने का लक्ष्य रहता है।”
ग्रामीणों ने मांग की है कि शिक्षा विभाग ऐसे लापरवाह शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि बच्चों की पढ़ाई फिर से पटरी पर लौट सके।