झाबुआ — जिले के रामा विकासखण्ड के ग्राम भैंसाकरई में जल संसाधन विभाग द्वारा करोड़ों की लागत से बनाए तालाब के घटिया निर्माण कार्य की पोल खुल गई । जिसमें वेस्ट वेयर का की कांक्रीट में सरीये नहीं डाले हुए और गिट्टी की जगह पत्थर का उपयोग किया गया, जिससे गुणवत्ता के अभाव में एक हिस्सा भरभरा कर गिर गया और क्षतिग्रस्त हो गया , साथ ही पानी का रिसाव भी हो रहा है ।
घटिया निर्माण की खुली पोल ।
जानकारी अनुसार जिले के रामा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत आंबा के ग्राम भैंसाकरई में जल संसाधन विभाग द्वारा तालाब निर्माण किया गया। करीब 2.90 करोड़ की लागत से इसका निर्माण किया गया । तालाब का निर्माण संभवत वर्ष 2024 में ही पूर्ण हुआ है इसका निर्माण कार्य रतलाम की फर्म प्रजापति इंटरप्राइजेस द्वारा किया गया । तालाब निर्माण के प्रथम बारिश में ही घटिया निर्माण की पोल खुल गई और वेस्ट वेयर की कांक्रीट का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है ।
गिट्टी की जगह बड़े बड़े पत्थरों का उपयोग ।
इस कांक्रीट को देखा तो नजर आया कि बड़े बड़े पत्थरों मे रेत सीमेंट का माल डाला गया है और कांक्रीट में सरीये का उपयोग भी नजर नहीं आया । जिससे इसकी गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ा है। इस वेस्ट वेयर में नियमानुसार कांक्रीट हुआ है या नहीं …..जांच का विषय है बहुत ही कम मात्रा में गिट्टी का उपयोग हुआ है। देखने में ऐसा प्रतीत होता है कि नदी के बंडे में सीमेंट डालकर कांक्रीट किया गया है
सरीये का उपयोग नहीं किया गया ।
भैंसाकरई तालाब में वेस्ट वेयर की कांक्रीट में सरीये के उपयोग नहीं को लेकर जल संसाधन विभाग के विपिन पाटीदार से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सरीये का उपयोग किया गया है जो आपको नजर नहीं आ रहे हैं जबकि धरातल पर टूटी हुई कांक्रीट में कहीं पर भी सरीया नजर नहीं आ रहा है और वेस्ट वेयर की कांक्रीट में भी नहीं देखा गया । इस तरह विभागीय अधिकारी गलत जानकारी देकर शासन प्रशासन को गुमराह कर रहे हैं। इस तालाब निर्माण की उच्च स्तरीय जांच होना चाहिए ।
गारंटी अवधि में है रिपेयर करवाया जायेगा ।
जब इस गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य को लेकर विभाग के अधिकारी से जानकारी चाही , तो उनका कथन था कि उक्त तालाब गारंटी अवधि में है ठेकेदार से इसे रिपेयर करवाया जाएगा । प्रश्न अब भी वही है कि जब कांक्रीट में सरीये का उपयोग नहीं किया गया है तो क्या ठेकेदार पूरा वेस्ट वेयर को तोड़कर सरीये डालकर पुनः गिट्टी करेगा या फिर लिपापोती । यदि सिर्फ ठेकेदार रीपेयर करता है और गारंटी अवधि समाप्त होने के पश्चात पुन कोई हिस्सा क्षतिग्रस्त होता है तो क्या विभाग इसकी जवाबदेही लेगा । पानी का रिसाव भी हो रहा है । तालाब के वेस्ट वेयर के एकाध हिस्से से पानी का रिसाव प्रारंभ हो गया है । और इस रिसाव से धीरे धीरे पानी भी निकल रहा है जो साफ तौर पर नजर आ रहा है । कही न कही विभागीय लापरवाही का ही नतीजा है कि सही तरीके से नहीं किया गया है और भविष्य में यदि यह रिसाव एक से अधिक जगह से प्रारंभ होता है तो इसके लिए भी विभाग ही जिम्मेदार होगा और जब गारंटी अवधि समाप्त होती है तो इस स्थिति में क्या होगा ।
विभागीय इंजीनियर की लापरवाही ।
इस तरह के लापरवाही पूर्वक कार्यशैली के लिए विभाग का सब इंजीनियर पूर्ण रूप से जिम्मेदार है । चूंकि कांक्रीट के समय सब इंजीनियर ने ध्यान नहीं दिया होगा और ठेकेदार द्वारा मनमानी पूर्वक कांक्रीट कार्य किया होगा, जिससे यह हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया । प्रश्न यह भी है कि क्या सब इंजीनियर ने बील भूगतान में सरीये को लेकर क्या दर्शाया गया है जांच का विषय है । यदि भविष्य में भी कोई भी प्रकार की लापरवाही उजागर होती है तो सब इंजीनियर ही दोषी होना चाहिए ।
घटिया निर्माण की शिकायत केबिनेट मंत्री निर्मला भूरिया को की थी
जानकारी अनुसार ग्राम पंचायत आंबा के सरपंच मिट्ठू अरड़ ने तालाब निर्माण के दौरान कांक्रीट के समय सीमेंट के साथ नदी का बंडा उपयोग को लेकर, केबिनेट मंत्री निर्मला भूरिया को भी जानकारी दी थी । लेकिन फिर भी ठेकेदार और विभाग द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया ।