दिव्य दृष्टि” वाले नगर निरीक्षक बिस्तर पेटी में छिपे पटाखे देख लेते हैं, फ्रीज़ के अंदर रखी हुई बियर की बोतलें भी पकड़ लेते हैं, लेकिन दिनदहाड़े शराब से भरे वाहन उनके सामने से निकल जाते हैं और उन्हें दिखाई नहीं देते।
नगर निरीक्षक पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई के आरोप, सोशल मीडिया पर आदिवासी युवाओं का फूटा गुस्सा
झाबुआ। नगर निरीक्षक भास्करे पर एक बार फिर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि “दिव्य दृष्टि” वाले नगर निरीक्षक बिस्तर पेटी में छिपे पटाखे देख लेते हैं, फ्रीज़ के अंदर रखी हुई बियर की बोतलें भी पकड़ लेते हैं, लेकिन दिनदहाड़े शराब से भरे वाहन उनके सामने से निकल जाते हैं और उन्हें दिखाई नहीं देते।
शहर के आदिवासी युवाओं ने इस कथित दोहरे रवैये को लेकर सोशल मीडिया पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। युवाओं का आरोप है कि गरीब आदिवासी परिवारों पर दो-दो बोतल शराब मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाती है, जबकि बड़े शराब माफियाओं पर कार्रवाई को लेकर पुलिस का रवैया नरम दिखाई देता है।
सोशल मीडिया पर एक महिला से जुड़े विवादित वीडियो और फोटो को लेकर भी नगर निरीक्षक भास्करे चर्चा में बने हुए हैं, जिसे लेकर स्थानीय लोग नाराजगी जता रहे हैं। युवाओं का कहना है कि पुलिस को कानून सभी के लिए बराबर लागू करना चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति में गरीब और सक्षम लोगों के बीच साफ भेदभाव दिख रहा है।
आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस प्रशासन और जिला अधिकारियों से इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि कानून व्यवस्था पर जनता का भरोसा कायम रहे और शराब माफियाओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।