मांडली थाना, मेघनगर क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कल रात लगभग 10 बजे शराब ठेकेदार से जुड़े कुछ लोगों द्वारा अवैध हथियार (कट्टा/बंदूक) लहराते हुए आदिवासी समाज के लोगों को खुलेआम धमकाने एवं फायरिंग करने की जानकारी वायरल वीडियो के ज़रिए सामने आई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि— जब घटना के समय मेघनगर थाना प्रभारी मौके पर मौजूद थे, तब भी शराब ठेकेदार पक्ष पर अब तक एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई? क्या प्रशासन दबाव में है? या फिर शराब माफियाओं की छत्रछाया में पूरे इलाके का कानून व्यवस्था तंत्र पंगु हो चुका है?
स्थानीय आदिवासी समाज का आरोप है कि— पुलिस रिपोर्ट लिखने की बजाय समझौते का दबाव बना रही है। पीड़ितों से कहा जा रहा है कि मामले को शांत कर दिया जाए। जबकि वीडियो में धमकाना और फायरिंग साफ दिख रही है।
आदिवासी समाज की मांग बिल्कुल स्पष्ट है: निष्पक्ष कार्रवाई हो अवैध हथियारबंद लोगों पर सख्त धाराओं में FIR हो शराब माफियाओं को राजनीतिक/प्रशासनिक संरक्षण खत्म किया जाए
लोगों का सवाल बिल्कुल वाजिब है— जब आदिवासी ग्रामीणों को खुलेआम गोली दिखाकर धमकाया जा रहा है, तब भी प्रशासन चुप क्यों है? आखिर शासन–प्रशासन इन दारू माफियाओं का साथ क्यों दे रहा है?
पीड़ितों ने सभी लोगों से अपील की है कि इस वीडियो को अधिक से अधिक साझा करें ताकि दबे-कुचले ग्रामीणों को न्याय मिल सके और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सके।