झाबुआ – एक तरफ शासन प्रशासन द्वारा पोधारोपण और पर्यावरण सहेजने की बात कही जा रही है वहीं दूसरी ओर MPEB द्वारा शहरी क्षेत्र में मेंटनेंस के लिए पेड़ों की सिर्फ कांट छांट की जाना थी लेकिन विभागीय अमले ने लापरवाही पूर्वक एक हरे-भरे पेड़ को ही काटा दिया । इस तरह की मनमानी कटाई से न केवल हरियाली कम होती है बल्कि स्थानीय तापमान और वायु गुणवत्ता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
जानकारी अनुसार गुरुवार को शहर में कलेक्टर निवास से आगे की ओर से जैल चौराहे तक MPEB द्वारा मेंटनेंस कार्य के लिए पेड़ों की कांट-छांट की जाना थी जिससे विघुत लाईन प्रभावित न हो। या विघुत लाईन पर इन पेड़ों की टहनियों से फाल्ट होने की संभावना बनी रहती थी। लेकिन विभागीय अमले ने लापरवाही पूर्वक कार्य करते हुए एक हरे भरे पेड़ को ही काट दिया । जबकि यह पेड़ एक ऐसे विभागीय कार्यालय के बाहर था जो पौधारोपण करने और पर्यावरण संरक्षण की बात करता है उस विभाग के अधिकारी कर्मचारी को भी यह नजर नहीं आया । वही यह पेड़ रोड से काफी दूर होने के साथ , इससे कोई आवागमन भी अवरूद्ध नहीं हो रहा था और वन विभाग के कार्यालय के गेट के समीप था जिससे विघुत लाईन भी प्रभावित नहीं हो रही थी बावजूद इसे काटा गया है । बावजूद बिना उचित कारण और बिना अनुमति व जानकारी दिए पेड़ को काट दिया गया । जब हमने वहां काम रहे अमले से बात की और पूछा किस विभाग द्वारा यह छंटाई कार्य किया जा रहा है तो उन्होंने कहा विघुत विभाग । लापरवाहीपूर्वक या बिना अनुमति हरा-भरा पेड़ काटना कानूनन अपराध है। भारत में पेड़ काटने पर अलग-अलग कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है । पर्यावरण प्रेमी व शहरवासियों ने इसे पर्यावरण के साथ गंभीर खिलवाड़ बताते हुए संबंधित विभाग पर कार्रवाई की मांग की है ।
नियमानुसार पेड़ काटने पर क्या कार्रवाई की जा सकती है ……?
1. इंडियन फॉरेस्ट एक्ट / राज्य वन अधिनियम (Indian Forest Act)
यदि पेड़ सरकारी भूमि, वन भूमि या पंचायत भूमि पर है:
बिना अनुमति पेड़ काटना गंभीर अपराध है।
सज़ा:
जुर्माना (राज्य के अनुसार ₹5,000 से लेकर ₹1 लाख+ तक)
3 महीने से 1 साल तक की जेल, कभी-कभी अधिक ।
आपराधिक मामला (IPC के तहत)
यदि पेड़ काटने से सार्वजनिक नुक़सान हुआ या पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है, तो:
IPC 268 (Public Nuisance)
IPC 430 (जल, वायु या पर्यावरण को नुकसान) के तहत मामला दर्ज हो सकता है।