झाबुआ। जिले में अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के नाम पर विभागीय ढोल तो बहुत बजते हैं, लेकिन ज़मीनी सच अक्सर इन दावों को कटघरे में खड़ा करता है। एक बार फिर ऐसा ही हुआ है—आबकारी विभाग ने आज 1 लाख 56 हजार रुपये की शराब पकड़कर “बड़ी कार्रवाई” का दावा किया है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह वाकई बड़ी कार्रवाई है? क्योंकि इसी जिले की पुलिस ने हाल ही में 1 करोड़ 63 लाख रुपये की अवैध शराब जब्त की है, जो आबकारी विभाग की कार्रवाई को बेहद छोटा और दिखावटी साबित करती है। आबकारी विभाग कलेक्टर के सामने “काम” और वास्तविकता में सिर्फ “दिखावा”?
कलेक्टर झाबुआ श्रीमती नेहा मीना और संभागीय उड़नदस्ता इंदौर के उपायुक्त श्री संजय तिवारी के कड़े निर्देशों के बावजूद आबकारी विभाग की कार्रवाई बार-बार सवालों के घेरे में आ रही है।
आज की कार्रवाई में:
सिर्फ 39 पेटी (437.76 BL)
बाजार मूल्य ₹1,56,240
और आरोपी मंगू मेड़ा मौके से आसानी से फरार जबकि जिले में अवैध शराब के अड्डे खुलेआम फल-फूल रहे हैं।
पुलिस के सामने फीकी पड़ती आबकारी की कार्रवाई
हाल ही में झाबुआ पुलिस ने जिस स्तर की कार्रवाई की है— 1 करोड़ 63 लाख रुपये से अधिक की तस्करी पकड़ी, उसके सामने आबकारी की 1.5 लाख की कार्रवाई एक औपचारिकता और दिखावा भर लगती है।
लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं:
आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई का मापदंड क्या है?
क्या उड़नदस्ते और कलेक्टर के सामने सिर्फ रिपोर्टिंग के लिए छोटी-छोटी कार्रवाइयाँ दिखाई जाती हैं?
क्या विभाग वास्तव में शराब माफियाओं पर कार्रवाई चाहता भी है?
या फिर यह विभाग सिर्फ कागजी कार्रवाई और प्रेस नोट तक सीमित रह गया है?
जनता का तंज—“आबकारी विभाग हमेशा से उड़नदस्ते और कलेक्टर की आँखों में धूल झोंकता आया है”
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आबकारी विभाग बड़े नेटवर्क पर हाथ डालने से बचता है। गुजरात सीमा पर लगातार चल रही शराब तस्करी पर विभाग की पकड़ कमजोर दिखाई देती है।
जब माफिया खुलेआम कारोबार कर रहे हैं और पुलिस करोड़ों की खेप पकड़ रही है— तब आबकारी विभाग का “1.56 लाख की बड़ी कार्रवाई” कहना जनता की आँखों में धूल झोंकने जैसा माना जा रहा है। तीखा सवाल—असली लड़ाई कौन लड़ रहा है?
पुलिस?
या फिर सिर्फ प्रेस नोट जारी करने वाला विभाग? जब तक आबकारी विभाग कड़े और करोड़ों की तस्करी पर सीधी कार्रवाई नहीं करता, तब तक इस तरह की छोटी कार्रवाइयाँ सिर्फ दिखावा और कागजी बहादुरी ही कहलाएंगी।