झाबुआ – तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण के शिष्य मुनि कोमल कुमार जी व मुनि सिद्धार्थ कुमार जी का विहार राणापुर से झाबुआ की ओर प्रस्थान के दौरान ढेकल के माध्यमिक स्कूल में एक दिन का प्रवास रहा । मुनि श्री ने बच्चों को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नशा जीवन को अंधकार की ओर ले जाता है, जबकि संयम, अनुशासन और सकारात्मक आदतें उज्ज्वल भविष्य की नींव रखती हैं। मुनि श्री ने सरल और प्रेरणादायी उदाहरणों के माध्यम से बच्चों को समझाया कि तंबाकू, शराब, गुटखा जैसे नशे न केवल स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाते हैं, बल्कि व्यक्तित्व विकास और शिक्षा पर भी विपरीत प्रभाव डालते हैं। यह भी बताया कि नशा व्यक्ति की सोच, स्वास्थ्य और भविष्य—तीनों को प्रभावित करता है। नशे की लत हिंसा, असंयम और गलत प्रवृत्तियों की ओर ले जाती है, जो अहिंसा के सिद्धांतों के सर्वथा विपरीत है। उन्होंने बच्चों से आग्रह किया कि वे न सिर्फ स्वयं नशे से दूर रहें बल्कि परिवार और मित्रों को भी इसके दुष्परिणामों से अवगत कराएँ।
मुनि श्री ने कहा कि अहिंसा केवल शारीरिक हिंसा से बचने का नाम नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म से किसी को भी तकलीफ़ न पहुँचाने का संकल्प है। उन्होंने समझाया कि अहिंसा अपनाने से जीवन में शांति, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मुनि श्री ने यह भी बताया कि अहिंसा, नैतिकता और जीवन मूल्यों के महत्व पर प्रेरणादायक संदेश दिया। मुनि श्री ने कहा कि अहिंसा केवल किसी को चोट न पहुँचाने का संकल्प नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म से सभी के प्रति करुणा, प्रेम और सद्भाव बनाए रखने का जीवन व्यवहार है।उन्होंने नैतिकता को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि सत्य, ईमानदारी, अनुशासन और सेवा भाव जैसे गुण व्यक्ति को समाज में सम्मान दिलाते हैं और उसे सही दिशा प्रदान करते हैं। नैतिक आचरण से न सिर्फ व्यक्ति का चरित्र मजबूत होता है बल्कि उसके माध्यम से समाज में भी सकारात्मक वातावरण बनता है। डिजिटल और आधुनिक युग में सही और गलत के बीच निर्णय क्षमता तब ही विकसित होती है जब जीवन में नैतिकता के संस्कार हों। मुनिश्री ने उपस्थित बच्चों को नशामुक्त जीवन शैली अपनाने की बात कही और संकल्प भी कराएं ।