नगर निरीक्षक द्वारा जारी सूचना और जिला पुलिस के आधिकारिक प्रेस नोट के बीच स्पष्ट विरोधाभास सामने आया है। एक ओर नगर निरीक्षक के स्तर से यह बताया गया कि नाबालिग छात्र स्कूल से गायब हुआ, वहीं दूसरी ओर जिला पुलिस के प्रेस नोट में बालक को गुम बताया गया है, जिसे बाद में गुजरात राज्य से सुरक्षित दस्तयाब किया गया।
प्रेस नोट का विवरण जिला पुलिस द्वारा 11.11.2025 को जारी प्रेस नोट के अनुसार कोतवाली थाना झाबुआ में अपराध क्रमांक 943/2025 धारा 137(2) बीएनएस के तहत 14 वर्षीय नाबालिग बालक की गुमशुदगी दर्ज की गई थी। परिजनों द्वारा दोपहर लगभग 4 बजे रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए तकनीकी विश्लेषण, संभावित स्थलों का निरीक्षण तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में सघन सर्चिंग की। इसके परिणामस्वरूप मात्र 6 घंटे के भीतर बालक को गुजरात राज्य से सुरक्षित दस्तयाब कर उसके परिजनों को सौंप दिया गया।
नगर निरीक्षक का बयान वहीं नगर निरीक्षक स्तर से प्रसारित जानकारी में यह कहा गया कि संबंधित छात्र आई.पी.एस. स्कूल से गायब हुआ था। इस बयान में बालक के स्कूल से लापता होने का उल्लेख प्रमुखता से किया गया, जो जिला पुलिस के प्रेस नोट में दर्ज तथ्यों से मेल नहीं खाता।
उठते सवाल
क्या बालक वास्तव में स्कूल परिसर से गायब हुआ था या सामान्य रूप से गुमशुदा था?
यदि स्कूल से गायब हुआ, तो यह तथ्य प्रेस नोट में स्पष्ट रूप से क्यों नहीं दर्शाया गया?
दो अलग-अलग आधिकारिक बयानों से आमजन में भ्रम की स्थिति क्यों बनी?
स्पष्टता की आवश्यकता घटना में पुलिस की तत्परता से बालक का सुरक्षित मिलना निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन जिम्मेदार पदों से जारी विरोधाभासी बयानों ने सूचना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनहित में यह आवश्यक है कि पुलिस प्रशासन एक स्पष्ट और एकरूप तथ्यात्मक स्थिति सामने रखे, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की गलतफहमी या अफवाह को रोका जा सके।
बालक की सुरक्षित बरामदगी राहत की बात है, परंतु सूचना तंत्र में सामंजस्य और पारदर्शिता उतनी ही जरूरी है। प्रशासन से अपेक्षा है कि वह इस मामले में स्थिति स्पष्ट कर एक आधिकारिक, संयुक्त वक्तव्य जारी करे।