झाबुआ – झाबुआ के मिंडल में 26 नवंबर को तेज गति से आ रही कार ने शहर के दो युवकों को टक्कर मारी थी जिसमें दो बच्चों की मौत हो गई थी पीड़ीत परिवार शंकरलाल परमार , छीपसिह मेडा निवासी रातितलाई, झाबुआ ने पुलिस को शिकायती आवेदन देते हुए लोकेन्द्र पडियार नि-मेघनगर , पुखराज निवासी -फुलमाल , मुकेश भटेवरा निवासी आजाद नगर/भाबरा को इस घटनाक्रम का दोषी मानते हुए कारवाई की मांग की थी । लेकिन घटना के 27 दिन बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार न्याय के लिए भटक रहा है । वही पीड़ित परिवार ने अब मंगलवार को जनसुनवाई में आवेदन देते हुए न्याय की मांग की है।
पीड़ित परिवार से शंकरलाल परमार व दीपसिंह मेडा ने मंगलवार को जनसुनवाई में आवेदन देते हुए घटनाक्रम को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग की है आवेदन में बताया कि हम प्रार्थी गण के बालक रूद्र मेडा एवं नयन उर्फ यश परमार की मृत्यू उक्त विपक्षीगणो के द्वारा ब्रेजा कार को लापरवाही एव तेजगति से चलाकर ऐक्सीडेंट से की गई थी जिसमें आरोपीगणो के द्वारा नयन उर्फ यश की बाडी ट्राला में मिलना उक्त आरोपीगणो के द्वारा ऐक्सीडेंट के बाद यश के साथ गारपीट करके हत्या का होना संदेह हो रहा है। यह भी बताया कि विगत मंगलवार को पुलिस अधीक्षक , झाबुआ ने बताया कि ड्राइवर नहीं है एवं उक्त तीन आरोपीगण लोकेन्द्र पडियार एवं अन्य साथ मनोज एवं मनीष बताये एवं सभी लोगो की गवाही के लिये थाने में बुलाया एवं गवाही हो चुकी हैं परन्तु डीवीआर आने के बाद आगे आरोपीगणो पर धारा बढ़ाने एवं अरेस्ट कर जेल भेजने एवं कार्यवाही का आश्वासन मिला था। परन्तु उक्त आश्वासन के बाद भी आज तक डीवीआर नहीं बताया गया एवं आरोपीगणो पर कार्यवाही नहीं हुई । प्रार्थी गण ने आरोप लगाते हुए कहा कि करीब 27 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने आरोपीयों को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की है।
पीड़ित परिवारजन ने यह भी बताया कि थाना प्रभारी झाबुआ के द्वारा बताया गया कि डीवीआर जप्त कर लिया गया है एवं आज कल करके काफी समय निकाल दिया तथा जॉच डीएसपी कमलेश शर्मा के द्वारा की जा रही है । परन्तु जब हम प्रार्थी गण डीएसपी के पास मिलने के लिए जाते हैं तो बताया जाता है कि डीएसपी सर झाबुआ के पारा गये हैं तो कभी छुटटी पर गये , तो कभी मिटींग में , ऐसा बताकर सही जवाब नहीं दिया जा रहा है । उक्ट घटना हुये करीबन 27 दिन बीत जाने के बाद भी आरोपीगणो पर कार्यवाही नहीं हुई हैं। पीड़ित परिवार जन ने आरोपीगणो से मिलीभगत एवं सांठ गांठकरके आरोपीगणो को बचाने का आरोप लगाया ।
संपूर्ण मामले में पीड़ित परिवारजन ने निष्पक्षता से जाँच करवाकर, आरोपीगणो को अरेस्ट करके जेल भेजने की कार्यवाही की बात कही हैं। अन्यथा धरना प्रदर्शन एवं चक्काजाम करने की बात कही , जिसकी समस्त जवाबदारी पुलिस प्रशासन की रहेगी। देखना यह दिलचस्प होगा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में पुलिस कब तक कारवाई करेगी…?