साहिबजादों के बलिदान को किया गया नमन झाबुआ। स्थानीय शारदा विद्या मंदिर (एमपी बोर्ड) बिलिडोज 26 दिसंबर, शुक्रवार कोवीर बाल दिवस अत्यंत श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया गया। यह दिवस सिक्खों के दसवें गुरु, गुरु गोविंदसिंह जी के छोटे साहिबजादों, बाबा जोरावरसिंह और बाबा फतेहसिंह के सर्वाेच्च बलिदान की स्मृति में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को देश के गौरवशाली इतिहास से परिचित करवाना और उनमें राष्ट्रवाद एवं धर्म के प्रति अडिग रहने की भावना जागृत करना था। समारोह की शुरुआत संस्था संचालिका किरण शर्मा, संस्था प्राचार्य डॉ. कंचन चौहान एवं शाला स्टॉफ ने साहिबजादों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। पश्चात् विद्यार्थियों ने ‘शब्द कीर्तन’ की मधुर प्रस्तुति सुनी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। विद्यार्थियों को एक अत्यंत मार्मिक लघु फिल्म दिखाई गई, जिसमें सरहिंद के नवाब की कचहरी में साहिबजादों की निडरता और उनके दीवार में चिनवाए जाने के ऐतिहासिक प्रसंग को विद्यार्थियों ने देखा। इस दृश्य ने उपस्थित सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों की आंखों को नम कर दिया। इस अवसर पर विद्यालय में अंतर-सदन ( प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। कक्षा 8, 9 तथा 10वीं के विद्यार्थियों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता रखी गई। जिसका विषय ‘वीरता और साहस’ था। वहीं कक्षा 11, 12वीं के छात्रों के लिए साहिबजादों के जीवन पर आधारित भाषण प्रतियोगिता और श्कविता पाठ का आयोजन हुआ। भारत सरकार ने वीर बलिदान दिवस घोषित किया कार्यक्रम के समापन सत्र में संस्था संचालिका किरण शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वीर बाल दिवस केवल एक ऐतिहासिक घटना की याद नहीं है, बल्कि यह अन्याय के खिलाफ डटे रहने की प्रेरणा है। आज के युग में युवाओं को इन महान आत्माओं के चरित्र से ईमानदारी, साहस और निस्वार्थ सेवा का गुण सीखना चाहिए। संस्था प्राचार्य डॉक्टर कंचन चौहान ने भारत सरकार द्वारा इस दिवस को वीर दिवस घोषित करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रहें। साथ ही विद्यार्थियों द्वारा वीर बाल दिवस कार्यक्रम में की गई सहभागिता की भूरी-भूरी प्रशंसा की। अंत में आभार सतीश लाखेरी ने माना।