झाबुआ

एमपीईबी लाईट पोल स्थापना में , कांक्रीट कार्य की गुणवत्ता पर उठे सवाल

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झाबुआ/अंचल — मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी (एमपीईबी) द्वारा लगाए जा रहे लाईट पोलों के कांक्रीट फाउंडेशन कार्य को लेकर गुणवत्ता संबंधी सवाल सामने आने लगे हैं। तकनीकी मानकों के अनुसार लाईट पोल स्थापना की मजबूती पूरी तरह उसके फाउंडेशन पर निर्भर करती है, लेकिन कई स्थानों पर मानकों की अनदेखी होने की शिकायतें मिल रही हैं।


शहर के विभिन्न क्षेत्रों में एमपीईबी द्वारा पुराने लाईट पोल के स्थान पर नवीन पोल लगाए जा रहे हैं संभवतः ठेकेदार के माध्यम से काम पूर्ण किया जा रहा है । पोल स्थापना में कांक्रीट कार्य बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी पर पोल की मजबूती, सीधापन और दीर्घकालिक सुरक्षा निर्भर करती है । वही शहर में लाईट पोल स्थापना में नियमों की अनदेखी करते हुए , खुदाई के दौरान या रोड आसपास पड़े पत्थरो से रोड कांक्रीट कार्य किया जा रहा है । कुछ तगारी रेत ,सीमेंट और गिट्टी का मिश्रण और फिर बड़े पत्थरों का उपयोग । वही निर्धारित मापदंड अनुसार भी खुदाई नहीं की गई है । जानकारी के अनुसार एमपीईबी के अंतर्गत लगाए जाने वाले 8 से 11 मीटर ऊंचे  लाईट पोलों के लिए M20 या M25 ग्रेड RCC कांक्रीट का उपयोग अनिवार्य है। इसके लिए गड्ढे का निर्धारित आकार, ISI मानक सीमेंट, साफ रेत और 20 मिमी क्रश्ड गिट्टी का उपयोग किया जाना चाहिए। साथ ही पोल को सीधा (प्लम्ब) रखने, वाइब्रेशन से कांक्रीट सैटलिंग और कम से कम 7 से 14 दिन तक क्योरिंग आवश्यक मानी गई है ।


स्थानीय आमजनों का कहना है कि कुछ स्थानों पर कांक्रीट में गिट्टी की जगह रोड पर पडे बड़े पत्थरों का उपयोग किया गया, वहीं कहीं बिना वाइब्रेशन और क्योरिंग के ही पोल खड़े कर दिए गए। इससे भविष्य में पोल के झुकने या गिरने का खतरा बना हुआ है, जो आमजन की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
निर्माण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फाउंडेशन कमजोर होगा तो तेज हवा, बारिश या भार के कारण लाईट पोल दुर्घटना का कारण बन सकता है। एमपीईबी के तकनीकी मानकों के अनुसार इस कार्य की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार और विभागीय इंजीनियर (JE/AE) की होती है। वही सूत्रों के अनुसार घटिया कांक्रीट कार्य पाए जाने पर न केवल भुगतान रोका जा सकता है वहीं एमपीईबी द्वारा सभी लाईट पोल स्थापना कार्यों की तकनीकी जांच कराई जाए और दोषपूर्ण निर्माण करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।

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