झाबुआ

मिंडल हादसे में हुई दो बच्चों की मौत को लेकर , 50 दिन बाद भी जांच अधूरी , पीड़ित परिवार न्याय के लिए भटक रहा

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झाबुआ – झाबुआ के मिंडल में 26 नवंबर को तेज गति से आ रही कार ने शहर के दो युवकों को टक्कर मारी थी जिसमें दो बच्चों की मौत हो गई थी पीड़ीत परिवार शंकरलाल परमार, छीपसिह मेडा निवासी रातितलाई, झाबुआ ने पुलिस को शिकायती आवेदन देते हुए लोकेन्द्र पडियार नि-मेघनगर, पुखराज निवासी -फुलमाल, मुकेश भटेवरा निवासी आजाद नगर/भाबरा को इस घटनाक्रम का दोषी मानते हुए कारवाई की मांग की थी। लेकिन घटना के 50 दिन बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार न्याय के लिए भटक रहा है। वही पीड़ित परिवार ने   जनसुनवाई में कलेक्टर और एसपी को भी आवेदन देते हुए न्याय की मांग की थी ।

पीड़ित परिवार से शंकरलाल परमार व दीपसिंह मेडा ने बताया कि हम प्रार्थी गण के बालक रूद्र मेडा एवं नयन उर्फ यश परमार की मृत्यू उक्त विपक्षीगणो के द्वारा ब्रेजा कार को लापरवाही एव तेजगति से चलाकर ऐक्सीडेंट से की गई थी जिसमें आरोपीगणो के द्वारा नयन उर्फ यश की बाडी ट्राला में मिलना उक्त आरोपीगणो के द्वारा ऐक्सीडेंट के बाद यश के साथ गारपीट करके हत्या का होना संदेह हो रहा है। यह भी बताया कि पुलिस द्वारा बताया कि  तीन आरोपीगण लोकेन्द्र पडियार एवं अन्य साथ मनोज एवं मनीष बताये एवं सभी लोगो की गवाही के लिये थाने में बुलाया एवं गवाही हो चुकी हैं परन्तु डीवीआर आने के बाद आगे आरोपीगणो पर धारा बढ़ाने एवं अरेस्ट कर जेल भेजने एवं कार्यवाही का आश्वासन मिला था। परन्तु उक्त आश्वासन के बाद भी आज तक डीवीआर नहीं बताया गया एवं आरोपीगणो पर कार्यवाही नहीं हुई। प्रार्थी गण ने आरोप लगाते हुए कहा कि करीब 50 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने आरोपीयों को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की है।

पीड़ित परिवारजन ने यह भी बताया जब इस संबंध में जांच के बारे में जानकारी ली ,  तो थाना प्रभारी झाबुआ द्वारा बताया गया था कि डीवीआर जप्त कर लिया गया है तथा जाँच डीएसपी कमलेश शर्मा के द्वारा की जा रही है। परन्तु जब हम प्रार्थी गण डीएसपी के पास मिलने के लिए जाते हैं तो बताया जाता है कि डीएसपी सर कभी छुटटी पर गये, तो कभी मिटींग में, ऐसा बताकर सही जवाब नहीं दिया जा रहा है। उक्ट घटना को करीबन 50 दिन बीत जाने के बाद भी आरोपीगणो पर कार्यवाही नहीं हुई हैं। पीड़ित परिवार जन ने आरोपीगणो से मिलीभगत एवं सांठ गांठकरके आरोपीगणो को बचाने का आरोप लगाया ।‌

चर्चा चौराहों पर चल पड़ी है कि आखिर क्यों पुलिस द्वारा 50 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कारवाई नहीं की जा रही है जबकि संभवतः डीवीआर को रिकवर के लिए बाहर भेजा गया था और अब तो वह भी आ गया होगी । फिर क्या पुलिस द्वारा आरोपीयों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है । या फिर जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है । इस तरह के संवेदनशील मामलों में पुलिस विभाग की लेट लतीफी जन चर्चा का विषय है ।

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