झाबुआ

नाले पर अतिक्रमण हटेगा या दबाव जीतेगा? क्या झाबुआ नगर पालिका इतिहास बना पाएगी?

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झाबुआ —- झाबुआ शहर को स्वच्छता एवं सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था की दिशा में नगर पालिका द्वारा नाले की सफाई का कार्य विधिवत प्रारंभ कर दिया गया है। नगर में कालका माता मंदिर क्षेत्र से स्वाद होटल तक नाले की सफाई पोकलेन मशीन के माध्यम से शुरू हो चुकी है।

नागरिकों का कहना है कि नाले की सफाई महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन शहर के लिए वास्तविक बदलाव तभी संभव है जब सीमांकन के बाद नाले की शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की सख्त कार्रवाई हो।

सफाई के बाद तुरंत सीमांकन

नगर पालिका से मिली जानकारी के अनुसार नाले की सफाई पूर्ण होते ही प्रशासन द्वारा नाले की भूमि एवं आसपास की जमीन का सीमांकन (Demarcation) तत्काल कराया जाएगा, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नाले की शासकीय जमीन पर कहां-कहां अतिक्रमण है और आगे की योजना बाधारहित बनाई जा सके।

खसरा नक्शों का दावा: सर्वे नंबर 105 व 88 पर अतिक्रमण

राजस्व के जानकारों का अभिप्राय है कि सरकारी खसरा खाते की नकलें देखने से संकेत मिलते हैं कि सर्वे नंबर 105 व 88 की नाले की जमीन पर कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा अतिक्रमण किया गया है।

जानकारों के अनुसार नाले की शासकीय भूमि पर रेस्टोरेंट/होटल का निर्माण,पक्की बाउंड्री, तथा LIC कार्यालय के बाजू वाली जगह पर पक्की बाउंड्री के साथ पक्का मकान,जैसी संरचनाएं मौजूद बताई जा रही हैं, जबकि रिकॉर्ड में वहां नाले की जमीन काफी चौड़ाई में दर्शाई जाती है।

कलेक्टर से मांग: निर्माण स्वीकृति/अनुमति की जांच हो

नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि नाले की शासकीय भूमि पर बने पक्के निर्माणों को किस आधार पर स्वीकृति/अनुमति मिली।
स्थानीय लोगों के अनुसार यदि इस बिंदु पर प्रारंभिक जांच की जाए तो वास्तविक स्थिति शीघ्र सामने आ सकती है।

शहरवासियों की मांग है कि सीमांकन/नपती की कार्रवाई पूर्ण जानकारी रखने वाले, निडर एवं निष्पक्ष अधिकारियों की टीम से कराई जाए, जिससे किसी प्रकार का स्थानीय दबाव न चले और दूध का दूध, पानी का पानी हो सके।

अतिक्रमण हटे तो पुलिया की जरूरत नहीं, रोड सीधे बनेगी

जानकारों का कहना है कि यदि प्रशासन ईमानदारी एवं सख्ती से सर्वे कराकर होटल/बाउंड्री क्षेत्र के पास नाले पर हुए पक्के अतिक्रमण को हटवाता है, तो यह मार्ग कलेक्टर कार्यालय के पीछे की पक्की सड़क से सीधे कालका माता मंदिर तक एक ही दिशा में निकाला जा सकता है।
ऐसी स्थिति में पुलिया बनाकर नाला क्रॉस करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे लागत भी बचेगी और आवागमन आसान होगा।

रामशरणम बिल्डिंग–कॉलेज रोड तक संभव: “अतिक्रमण हटाना जरूरी”

नागरिकों का सुझाव है कि यह नाला कालका माता मंदिर से आगे रामशरणम बिल्डिंग (कॉलेज रोड) तक जाता है। वहां भी अतिक्रमण हटाकर सीमांकन कराने पर सड़क कॉलेज रोड तक बनाई जा सकती है, जिससे शहर को एक वैकल्पिक और मजबूत यातायात मार्ग मिल सकेगा।

जनभागीदारी से अस्थायी मार्ग की मांग

शहरवासियों ने याद दिलाया कि झाबुआ में पूर्व में हाथीपावा पहाड़ी क्षेत्र में जनभागीदारी से सफल कार्य हुआ है। उसी तरह टेंडर प्रक्रिया के पूर्ण होने की प्रतीक्षा किए बिना मुर्रम डालकर अस्थायी मार्ग तैयार किया जा सकता है।
लोगों का कहना है कि जिले की हलमा परंपरा के जरिए यह काम तीन दिन में संभव है, जिससे तुरंत आवागमन शुरू हो सकेगा और ट्रैफिक समस्या में राहत मिलेगी।

अधिकांश नागरिकों का मत है कि नाला सफाई से अधिक महत्वपूर्ण चरण सीमांकन एवं अतिक्रमण हटाना है। यदि प्रशासन व नगर पालिका इस दिशा में निष्पक्ष कदम उठाते हैं तो यह झाबुआ शहर के लिए ऐतिहासिक परिवर्तन सिद्ध हो सकता है।

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