झाबुआ

60 से अधिक आराधको ने 9 दिवसीय शाश्वती श्री नवपद ओलीजी की तप आराधना की , तपस्वीयो ने किया पारणा

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झाबुआ- स्थानीय श्री ऋषभदेव 52 जिनालय उपाश्रय में आयोजित 9 दिवसीय श्री सिद्धचक्र नवपद ओलिजी तप आराधना का 3 अप्रैल शुक्रवार को सभी तपस्वियों के पारणे के साथ पूर्णाहुति हुई। यह नवपद ओलीजी स्व सुभद्रा देवी विरेन्द्र कुमार संघवी की स्मृति में, शशांक संघवी , आरजू संघवी व संघवी परिवार लाभार्थी बना । लाभार्थी परिवार‌ द्वारा सभी तपस्वियों का बहुमान किया गया। इस अवसर पर श्री संघ की ओर से लाभार्थी परिवार का शाल श्रीफल भेंटकर बहुमान किया गया।

श्री जैन श्वेतांबर श्रीसंघ द्वारा स्थानीय श्री ऋषभदेव बावन जिनालय आयंबिल खाता भवन में 9 दिवसीय चैत्र मास की शाश्वती श्री नवपद ओलीजी की आराधना 25 मार्च से शुरू हुई थी जो 2 अप्रैल को समाप्त हुई और 3 अप्रैल को पारणा।  यह नवपद ओलीजी की आराधना प.पू.विदुषी  साध्वी योगनिधि म.सा आदि ठाणा-3  की पावनकारी निश्रा में पूर्ण हुई । इसमें सकल श्रीसंघ के करीब 60 से अधिक आराधकों ने तपस्या की ।  श्री नवपद ओली जी की तपस्वियों के पारणे के साथ ही पूर्णाहुति हुई। इस अवसर पर प्रातः 8 बजे से स्थानीय बावन जिनालय मंदिर उपाश्रय में सभी तपस्वियों के पारणे कराए गए। पारणे के साथ ही लाभार्थी संघवी परिवार द्वारा सभी तपस्वीयों का बहुमान किया गया। तप के द्वारा जीव अपने संचित कर्मों को नष्ट कर मोक्ष के सुख का अधिकारी बनता है ।

नवपद ओली आराधना, जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है । इसे आयंबिल ओली के नाम से भी जाना जाता है। यह नौ दिन तक चलने वाला महत्वपूर्ण तपस्या पर्व है। दीपावली, होली, पर्यूषण आदि पर्व साल में एक बार आते हैं लेकिन शाश्वत सिद्धचक्र नवपद ओली जी साल में दो बार चैत्र मास व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है । अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, ज्ञान, दर्शन, चरित्र और तप की साधना ही नवपद ओली आराधना का सार है यह आराधना कर्मों की निर्जरा तथा शारीरिक व्याधि को दूर करती है। नवपद ओली जी का तप आयंबिल से किया जाता है ओली तप में आराधक एक बैठक पर एक समय भोजन करता है उसमें भी पानी उबला हुआ व भोजन रुखा अर्थात तेल- घी, मिर्च-मसाले, नमक -शक्कर, दूध-दही, आदि रहित या स्वादहीन भोजन करता है इस दौरान आराधक सुबह उठकर भक्तांबर पाठ, सामायिक, पूजन, प्रवचन श्रवण तथा दोपहर को देव वंदन व संध्या प्रतिक्रमण तथा निर्धारित माला जाप करता है।   । इस नवपद ओली में बच्चे , महिलाएं व पुरुषों ने इस तप को किया है । इस तप अनुसार सभी तपस्वियों ने सुबह उठकर पूजन-पाठ, प्रवचन श्रवण तथा संध्या में प्रतिक्रमण किया गया ।

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