झाबुआ – विगत माह से लोहा-सरिया के दामों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है, जिससे निर्माण कार्यों की लागत में भारी बढ़ोतरी हो गई है। सरिया के भाव बढ़ने से जहां एक ओर आमजन का घर बनाने का सपना महंगा होता जा रहा है, वहीं ठेकेदार और बिल्डर्स भी आर्थिक दबाव में नजर आ रहे हैं।
बाजार जानकारों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में सरिया के दामों में लगातार उछाल आया है। पहले जहां सरिया अपेक्षाकृत सस्ते दामों पर उपलब्ध था, वहीं अब कीमतों में करीब 8-12 हजार रुपये प्रति टन तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। इस तेजी के चलते निर्माण सामग्री की कुल लागत में बड़ा इजाफा हुआ है। स्थानीय ठेकेदारों का कहना है कि सरिया के दाम बढ़ने से मकान निर्माण की लागत प्रति वर्गफीट तक प्रभावित हो रही है। कई छोटे निर्माण कार्य या तो रोक दिए गए हैं या फिर धीमी गति से चल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका असर साफ नजर आ रहा है, जहां लोग लागत बढ़ने के कारण निर्माण टाल रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सरिया के दामों में वृद्धि के पीछे कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी, बाजार में मांग का बढ़ना और सप्लाई में असंतुलन प्रमुख कारण हैं । आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र झाबुआ जिले के गामीणजन का कहना है कि सरकार एक तरफ आवास योजना का लाभ दे रही है वहीं दूसरी ओर लोहा सरिया के दामों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी ने योजना को पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है । साथ ही सरिया के दामों में तेजी के बाद अब सीमेंट कंपनियों ने भी दामों में तेजी को लेकर संकेत दिए हैं । यह तेजी भी अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो सकती है ।
तेजी के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार सरिया के दाम बढ़ने के पीछे कई अहम वजह है
निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग
कच्चे माल (आयरन ओर, स्क्रैप) की कीमतों में वृद्धि
बाजार में सप्लाई की कमी
स्टील कंपनियों द्वारा बार-बार रेट बढ़ाना
क्षेत्र में लोहा-सरिया के दामों में पिछले तीन महीनों में लगातार तेजी देखने को मिली है। बाजार के तुलनात्मक अध्ययन से स्पष्ट होता है कि जनवरी से मार्च 2026 के बीच सरिया के भाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर निर्माण कार्यों पर पड़ा है।
तीन माह का तुलनात्मक आंकलन (प्रति टन अनुमानित दर):
जनवरी 2026: ₹50,000 – ₹52,000
फरवरी 2026: ₹54,000 – ₹57,000
मार्च 2026: ₹60,000 – ₹65,000
इस प्रकार तीन महीनों में सरिया के दामों में लगभग ₹8,000 से ₹12,000 प्रति टन तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो करीब 15% से 20% वृद्धि को दर्शाती है।
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, फरवरी माह से ही बाजार में तेजी का रुख देखने को मिला, जो मार्च में और अधिक बढ़ गया। इसके चलते छोटे और मध्यम स्तर के निर्माण कार्य प्रभावित हुए हैं।
ठेकेदारों का कहना है कि सरिया के बढ़ते दामों के कारण मकान निर्माण की लागत में प्रति वर्गफीट ₹40 से ₹70 तक का अतिरिक्त भार आ रहा है। कई लोग अपने निर्माण कार्य को टाल रहे हैं या फिर बजट में बदलाव करने को मजबूर हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि, मांग में इजाफा और सप्लाई में असंतुलन इस तेजी के प्रमुख कारण हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले महीनों में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
सरिया की कीमतों में वृद्धि से निर्माण लागत में बड़ा इजाफा हुआ है।
कई शहरों में एक महीने में 15–20% तक वृद्धि दर्ज की गई है
घर बनाने की लागत ₹50 प्रति स्क्वेयर फीट तक बढ़ गई
छोटे बिल्डर्स और MSME उद्योगों पर आर्थिक दबाव बढ़ा
दाम बढ़ने के असली कारण (मिक्स फैक्टर):
सरिया महंगा होने के पीछे कई कारण एक साथ काम करते हैं:
अंतरराष्ट्रीय संकट (जैसे ईरान-अमेरिका तनाव)
कच्चे माल (आयरन ओर, कोयला) की कीमत
ट्रांसपोर्ट महंगा होना
मांग बढ़ना (इंफ्रास्ट्रक्चर, निर्माण)
और संभावित कार्टेल व्यवहार