* *बुझते चिरागों को मिली रोशनी: 15 और 17 साल पुराने रिश्तों में फिर लौटी खुशहाली*
*धार, 8 मई 2026।* किसी भी तरह की हिंसा से महिला एवं बालिका सुरक्षा के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा और उनके सशक्तिकरण के लिए जिला कलेक्टर श्री राजीव रंजन मीना के निर्देशानुसार एवं जिला कार्यकम अधिकारी श्री सुभाष जैन के मार्गदर्शन में महिलाओं के शारीरिक हिंसा, मानसिक हिंसा, सामाजिक हिंसा, एवं आर्थिक प्रताड़ना को रोकने हेतु सेतु का कार्य करने का प्रयास करता है। जिससे महिलाओं व बालिकाओं के जीवन सुरक्षित करने में सहायता मिल सके। प्रशासक श्रीमती ज्योत्सना सिंह ठाकुर द्वारा बताया गया कि किसी भी हिंसा से पीडित महिलाओं को वन स्टॉप सेंटर (सखी) छः तरह की सहायता एक ही छत के निचे पुलिस सहायता, आपालकालीन सहायता, कानूनी सहायता, परामर्श सहायता, स्वास्थ्य सेवा व आश्रय सहायता, दी जाती है। वन स्टॉप सेंटर पर सी.एम. हेल्प लाईन जनसुनवाई पुलिस के माध्यम से व स्वयं से भी प्रकरण दर्ज होते है। प्रकरण में दोनों पक्षों को बुलवाकर व्यक्तिगत व सामुहिक काउंसिलिंग की प्रक्रिया कर परिवारों में सुलह समझौते का प्रयास किया जाता है। जिससे परिवारों को टूटने से बचाया जा सकें। काउंसलर चेतना राठौर द्वारा बताया कि प्रकरण 1 में प्रार्थिया द्वारा पति के अत्यधिक शंका के चलते शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना की शिकायत की थी। प्रार्थिया ने बताया कि विवाह को लगभग 15 वर्ष हो चुके है। परन्तु पति द्वारा आज भी लड़ाई झगडा मारपीट की जाती है। आपसी विवाद होने से प्रार्थिया अपने बच्चों को लेकर अपने मायके महाराष्ट्र चली गई थी और महाराष्ट्र से सीधा वन स्टॉप सेंटर धार आकर अपनी समस्या बताई और यह कहा की अब वह अपने पति के साथ जाना नही चाहती और तलाक चाहती क्योकि वह प्रार्थिया के साथ बच्चों को भी प्रताड़ित करते और ठीक से घर की जिम्मेदारीयाँ नही उठाते प्रार्थिया भी कम्पनी में काम कर घर खर्च उठाती है। विपक्षी को बुलवाया गया और दोनों पक्षों की काउंसिलिंग की गई। जिसमें दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी जिसमें दोनो ही पक्षों को ज्ञात हुआ कि दोनों पक्षों की छोटी-छोटी गलती है और गलतफहमी है जिसके चलते यह मनमुटाव की स्थिति बनी है। इसलिए दोनों पक्षों ने अपने परिवार के भविष्य को ध्यान में रख कर आपसी सामजस्य व प्यार के साथ आगे बढ़ने का निर्णय लिया और सभी साथ में खुशी-खुशी घर लौटे। वही दुसरे प्रकरण में प्रार्थिया ने बताया कि उनके विवाह को लगभग 17 वर्ष हो चुके है उनके 3 बच्चे है। पति शराब पीने के आदी है और शराब पीकर आये दिन लाड़ई झगड़ा मारपीट करते और प्रार्थिया को घर से बाहर निकाल देते। प्रार्थिया अपने पति के साथ ही रहना चाहती थी क्योंकि उनके 3 बच्चे है जो बढ़ती उम्र में है। आवेदन पर दोनों पक्षों को बुलवाकर दो से तीन बार काउंसिलिंग की गई है और समझाया गया है कि विपक्षी शराब पीना छोड दे क्योंकी शराब की वजह से उनकी जमीन भी बिक गई। यदि वह अपनी आदत नही छोडेगें तो पुरा परिवार इससे प्रभावित होगा। समझाईश के बाद विपक्षी के द्वारा आश्वासन दिया गया कि अब वह शराब नही पीयेगें अपनी पत्नी व बच्चे को प्यार से सम्मान के साथ रखेगें मारपीट नही करेगें दोनों साथ में हसी खुशी से लौटे। केस वर्कर लीला रावत, सरिता चौहान द्वारा केस फाईल तैयार की गई। महिला पुलिस आरक्षक संतोषी कटारिया काउंसिलिंग में उपस्थित थे।