आखिर क्यों पीएचई के मावी जी मेहरबान है हैंडपंप संधारण कार्य करने वाले ठेकेदारों पर आखिर क्यों – पीएचई विभाग हैंडपंप संधारण निविदा में उल्लेखित शर्त का पालन नहीं करवा पा रहा है । ठेकेदारों को करीब 40000 से 50000 प्रतिमाह की बचत । झाबुआ – जिले में पीएचई विभाग द्वारा हैंडपंप संधारण कार्य हेतु स्वीकृत निविदाओं में आदेशित फर्म या ठेकेदारों को अनुबंध अवधि में संधारण सामग्री व मजदूरों को केंद्रीय भण्डार गृह से हैंडपंप स्थल तक लाने एवं ले जाने की व्यवस्था ठेकेदार को स्वयं के व्यय पर करना होगी, साथ ही हैंडपंप संधारण कार्य में लगाए गए वाहन को कार्यालयीन परिसर में ही रखना होगा। निविदा में स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया है संपूर्ण कार्य परिवहन सहित , लेकिन पीएचई विभाग के आला अधिकारी इन नियमों का पालन नहीं करवा पा रहे हैं और विभाग के सब इंजीनियर , ठेकेदार की एमबी या माप पुस्तक भरकर बिल भुगतान करने में रुचि ले रहे हैं । जिले में विभिन्न ब्लाकों में पीएचई विभाग द्वारा हैंडपंप संधारण कार्य ठेकेदार पद्धति से किया जाता है जिले के राणापुर, मेघनगर, थांदला, पेटलावद, रामा व झाबुआ ब्लॉक हेतु ऑनलाइन निविदा आमंत्रित की गई । निविदा में उल्लेखित शर्त अनुसार ठेकेदार को हैंडपंप संधारण कार्य हेतु सामग्री केन्द्रीय भण्डार गृह से प्राप्त करना होगी। विशेष रूप से हैंडपंप संधारण कार्य हेतु संधारण सामग्री को केन्द्रीय भण्डार गृह या अनुविभागीय कार्यालय से हैंडपंप स्थल तक लाने एवं ले जाने की व्यवस्था ठेकेदार को स्वयं के व्यय पर करना होगी और इस हेतु ठेकेदार को अलग से भूगतान नहीं मिलेगा , चूंकि संपूर्ण निविदा परिवहन सहित है । साथ ही निविदा मे अनुबंध अवधि में ठेकेदार द्वारा कार्य संपादन हेतु लगायें गए, वाहनों को संधारण कार्य हेतु आकस्मिक कार्य संपादन को ध्यान रखते हुए, जीपीएस युक्त वाहन को कार्यालय परिसर में ही रखना होगा । जिससे संधारण कार्य प्रभावित न हो। याने अब ग्रामीण इलाकों के गांव व फलियों में हैंडपंप खराब होने पर ग्रामीणजन को सिर्फ पीएचई को सूचना देनी है । इसके बाद समयावधि में ठेकेदार द्वारा दुरूस्त किया जावेगा। जिले में हैंडपंप खराब होने पर जिले के ग्रामीण इलाकों में से ग्रामीणों को स्वयं के खर्च पर गांव या फलियों से हैंडपंप सामग्री को लाना नहीं होगा और नियमानुसार ठेकेदार को लाना होगा और फिर स्वयं के खर्च पर पुरानी सामग्री विभाग में जमा करना होगी । नियमानुसार संपूर्ण कार्य संबंधित ठेकेदार या फर्म को अपने खर्च पर करना होगा। वही आंमत्रित निविदा में स्पष्ट रूप से शर्त का उल्लेख किया गया है कि संपूर्ण निविदा कार्य में मजदूरी और परिवहन ठेकेदार या फर्म का रहेगा। वही हैंडपंप मेकेनिको को भी सामग्री भण्डार गृह से गांव फलियों तक स्वयं के खर्च पर नहीं ले जाना होगी। इसका पूर्ण परिवहन ठेकेदार को अपने स्वयं के व्यय और निविदा शर्त अनुसार करना होगा । समयावधि में हैंडपंप संधारण कार्य पूर्ण नहीं होने पर ठेकेदार या फर्म की जिम्मेदार होगी, न की विभाग की । आखिर क्यों मावी जी मेहरबान है हैंडपंप संधारण कार्य करने वाले ठेकेदारों पर जिले में हैंडपंप संधारण कार्य हेतु सभी 6 ब्लॉक में ठेकेदारो द्वारा वाहन संबंधी कागज़ी खानापूर्ति तो कर ली गई है लेकिन यह जीपीएस युक्त वाहन अब तक संधारण कार्य में नहीं लगाए गए हैं । यदि ठेकेदारों द्वारा निविदा की शर्त अनुसार कार्य हेतु वाहन लगाए जाते हैं तो संभवत 40000 से ₹50000 प्रति माह अतिरिक्त खर्च या भार ठेकेदारों को वहन करना होगा । वही विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह राशि की पूर्ण बचत ठेकेदारों को हो रही है । जिले की जनता अब भी हैंडपंप संधारण कार्य हेतु स्वयं के निजी खर्चे पर सामग्री का परिवहन कर रही है और जिसका भुगतान ठेकेदारों को प्राप्त हो रहा है वही जानकारी अनुसार राणापुर ब्लॉक के ठेकेदार जितेंद्र रूनवाल द्वारा शहर के किसी सड़क ठेकेदार के वाहन के कागजात पीएचई विभाग में जमा किए हैं और यह वाहन सड़क ठेकेदार के कार्य हेतु चल रहा है और निविदा शर्त अनुसार ठेकेदार द्वारा इस वाहन के नाम से परिवहन का भुगतान प्राप्त किया जा रहा है जो कि गलत है वही राणापुर ब्लॉक के ठेकेदार द्वारा हैंडपंप संधारण कार्य हेतु वाहन किसी मुन्ननलाल के नाम से रजिस्टर्ड है लेकिन यह वाहन अब तक रामा ब्लॉक में किसी भी हैंडपंप संधारण कार्य में देखा नहीं गया है ग्रामीणों से प्राप्त सुचना अनुसार अब तक पीएचई विभाग द्वारा कोई भी वाहन हैंडपंप संधारण कार्य के लिए वाहन नहीं भेजा गया है प्रश्न आखिर क्यों विभाग के मावी जी हैंडपंप संधारण कार्य करने वाले ठेकेदारों पर मेहरबान है कार्य प्रणाली से स्पष्ट है कि कहीं न कहीं आर्थिक लालच की दृष्टि ही वाहन अटेचमेंट की प्रक्रिया में बाधा बन रही है । कलेक्टर साहब एक नजर पीएचई विभाग की कार्यप्रणाली पर भी कलेक्टर साहब जिले में हैंडपंप संधारण कार्य के लिए निविदा की शर्त अनुसार अब तक जीपीएस युक्त वाहन संधारण कार्य में नहीं लगाए गए हैं यह जरूर है की कागजी खानापूर्ति पूर्ण कर ली गई है लेकिन धरातल पर यह वाहन अब भी नजर नहीं आ रहे हैं विभाग द्वारा इस संधारण कार्य में उपयोग वाहनों का परिवहन का भुगतान भी संबंधित ठेकेदार को दिया जा रहा है लेकिन पीएचई विभाग के मावी जी की मेहरबानी से अब तक यह वाहन नजर नहीं आए और जिले की जनता जल संकट की समस्या से जुझती हुई नजर आ रही है । यदि इन संधारण कार्य में लगे इन वाहनों के जीपीएस की जांच की जाए , तो संपूर्ण खुलासा हो सकता है । देखना यह दिलचस्प होगा कि कलेक्टर साहब मावी जी की मेहरबानी को लेकर कोई जांच पड़ताल की जावेगी या फिर ठेकेदारों की बल्ले बल्ले होगी…..?