झाबुआ

जैन समाज ने साधु संतों की सुरक्षा हेतु नीति व आर्यिका माताजी दुर्घटना प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच की माँग को लेकर ज्ञापन सौंपा

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झाबुआ – दिगंबर जैन समाज व सकल जैन समाज ने विहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा हेतु विशेष सुरक्षा व्यवस्था, राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति एवं आर्यिका माताजी दुर्घटना प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच की माँग को लेकर एसडीएम झाबुआ को ज्ञापन सौंपा ।

दोपहर करीब दो बजे सकल जैन समाज ने साधु संतों की सुरक्षा हेतु नीति व आर्यिका माताजी दुर्घटना प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच की माँग को लेकर भारत सरकार, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा ।  दिगंबर जैन समाज से विरेन्द्र मोदी ने ज्ञापन का वाचन करते हुए बताया कि हम समस्त जैन समाज अत्यन्त दुःख एवं गहरी वेदना के साथ आपका ध्यान हाल ही में विहाररत आर्यिका माताजी के साथ हुई अत्यन्त दुखद घटना की ओर आकर्षित करना चाहते हैं, जिसमें संघ की पूज्य आर्यिकाओं का असामयिक निधन हो गया । यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना भर नहीं मानी जा सकती। उपलब्ध तथ्यों एवं वीडियो क्लिपों के आधार पर समाज में गहरी आशंका एवं चिंता का वातावरण निर्मित हुआ है। अतः इस प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय जाँच अत्यन्त आवश्यक है । ज्ञापन में यह भी बताया कि जैन साधु-संत पूर्णतः निहत्थे, अहिंसक एवं पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं। वे किसी प्रकार की सुरक्षा या सुविधाओं का उपयोग नहीं करते तथा समाज में शांति, संयम और अहिंसा का संदेश प्रसारित करते हैं। ऐसे संतों के साथ लगातार बढ़ती दुर्घटनाएँ एवं हमले सम्पूर्ण समाज के लिए अत्यन्त चिंताजनक विषय हैं।

अतः हम निम्न मॉर्गे आपके समक्ष विनम्रतापूर्वक प्रस्तुत करते हैं-

प्रमुख माँगै

1. घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच

2. इस प्रकरण की SIT अथवा न्यायिक जाँच कराई जाए।

3.घटना से संबंधित सभी CCTV, वीडियो एवं डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित किए जाएँ।

4. दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्यवाही की जाए।

5. यदि सुनियोजित कृत्य अथवा षड्यंत्र के तथ्य मिलें, तो तदनुसार कठोर धाराएँ लगाई जाएँ ।

“संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू किया जाए । विहाररत साधु-संतों की सुरक्षा हेतुः विहार मार्गो पर प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक, हाईवे एवं भीड़भाड़ क्षेत्रों में विशेष सावधानी सुनिश्चित की जाए।

“राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाई जाए भारत सरकार द्वाराः पैदल विहार करने वाले संतों हेतु राष्ट्रीय guideline,सुरक्षा SOP, तथा संवेदनशील मार्गों हेतु विशेष प्रावधान निर्मित किए जाएँ । साधु-संतों के विरुद्ध अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखा जाए क्योंकिः साधु-संत आत्मरक्षा नहीं करते, वाहन या सुरक्षा साधनों का उपयोग नहीं करते तथा पूर्णतः अहिंसक जीवन जीते हैं। प्रशासन एवं समाज के बीच समन्वय तंत्र बने । “Sant Security Coordination Cell” एवं आपातकालीन संपर्क व्यवस्था निर्मित की जाए ।

जैन समाज सदैव शांति, अहिंसा, कानून और संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास रखता है। हमारा उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना एवं तपस्वी संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हमें पूर्ण विश्वास है कि प्रशासन इस अत्यन्त संवेदनशील विषय को गंभीरता से लेते हुए त्वरित एवं प्रभावी कदम उठाएगा  । इस दौरान दिगंबर जैन समाज से व्यवस्थापक निलेश शाह , तेरापंथ समाज अध्यक्ष मितेश गादीया , स्थानक समाज से प्रवीण रूनवाल , संजय जैन , राजेश मेहता  पूर्वेश कटारिया , सुरेश जैन , अनिल रूनवाल , रिंकू रुनवाल , मुकेश लोढ़ा , मऩोज जैन व महिला शक्ति आदि अनेक सकल जैन समाज के अनुयायी उपस्थित थे ।

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