झाबुआ – शहर के मेन बाजार बाबेल चौराहे पर स्थित करोड़ों रुपए मूल्य की बहुचर्चित संपत्ति को लेकर दिगंबर जैन समाज और मोदी परिवार के बीच वर्षों से चला आ रहा विवाद अब एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है । जहां एक ओर दिगंबर समाज द्वारा इस संपत्ति के वैध दस्तावेज होने की बात कही , वही दूसरी ओर मोदी परिवार इस संपत्ति को अपनी बता रहा है । शहर में चर्चा है इस बेशकीमती संपत्ति का असली मालिक कौन है ।
शहर के मेन बाजार में स्थित इस विवादित भवन में अचानक मरम्मत एवं निर्माण कार्य शुरू होने की सूचना मिलते ही दिगंबर जैन समाज के पदाधिकारी और समाजजन मौके पर पहुंच गए, जिसके बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बन गया। मामला इतना बढ़ा कि यह विवाद एसडीएम न्यायालय तक पहुंच गया। जानकारी के अनुसार बाबेल चौराहे पर स्थित लगभग 319 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की यह बेशकीमती संपत्ति वर्तमान में मालिकाना हक को लेकर कानूनी विवाद का विषय बनी हुई है। नगर पालिका द्वारा इस भवन को जर्जर घोषित किए जाने और खतरनाक भवनों की सूची में शामिल किए जाने के बावजूद विगत दिनों रात्रि में यहां मरम्मत कार्य शुरू किए जाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। वही दिगंबर जैन समाज का आरोप है कि जब संपत्ति के स्वामित्व का मामला एसडीएम कोर्ट में विचाराधीन है, तब रात के अंधेरे में निर्माण एवं मरम्मत कार्य शुरू करना पूरी तरह संदेहास्पद है । सूत्रों का कहना है कि शनिवार रात्रि में भी रेत को कार्यस्थल पर चढ़ाया जा रहा था और ऊपर कार्य प्रगति पर था । समाज का कहना है कि यदि किसी पक्ष को निर्माण कार्य करना था तो उसे न्यायालय और प्रशासन की अनुमति के साथ किया जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ । हालांकि मामले के तूल पकड़ने और दिगंबर जैन समाज द्वारा गंभीर आपत्तियां दर्ज कराने के बाद गुरुवार को झाबुआ एसडीएम, नजूल राजस्व निरीक्षक एवं पटवारी मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्यों की जांच की ।
दिगंबर जैन समाज झाबुआ द्वारा 3 जून को पुनः अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) झाबुआ को आवेदन सौंपकर समाज मंदिर से संबंधित भवन पर किए जा रहे कथित अवैध निर्माण कार्य को तत्काल रोकने की मांग की गई है । आवेदन में बताया गया है कि शहर के आजाद मार्ग, वार्ड क्रमांक 6 स्थित दिगंबर जैन समाज के नाम दर्ज भवन पर निर्माण कार्य को लेकर पूर्व में 27 मई 2025 एवं 18 जून 2025 को जनसुनवाई में शिकायत की गई थी। शिकायत के आधार पर प्रशासन द्वारा निर्माण कार्य पर रोक लगाए जाने की जानकारी भी दी गई थी, जबकि भवन के नामांतरण का मामला भी विचाराधीन बताया गया है । आवेदनकर्ताओं का आरोप है कि निर्माण कार्य पर रोक के बावजूद 3 जून की रात को पुनः निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि संबंधित भवन राजस्व अभिलेखों में करीब 73 वर्षों से तथा नजूल अभिलेखों में 46 वर्षों से दिगंबर जैन समाज के नाम दर्ज है । समाज की ओर से प्रशासन से मांग की गई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर निर्माण कार्य को तत्काल रुकवाया जाए तथा नियमों के विरुद्ध किए गए निर्माण को हटाने की कार्रवाई की जाए । अब इस मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।