झाबुआ। पुलिस उप महानिरीक्षक, इंदौर (ग्रामीण) रेंज, इंदौर श्री मनोज कुमार के दो दिवसीय झाबुआ प्रवास के अंतर्गत आज दिनांक 09 जून 2026 को पुलिस लाइन झाबुआ स्थित परेड ग्राउंड पर वार्षिक निरीक्षण परेड का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक झाबुआ श्री देवेंद्र पाटीदार सहित जिले के समस्त राजपत्रित अधिकारी एवं लगभग 200 अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत परेड द्वारा पुलिस उप महानिरीक्षक महोदय को सलामी देने के साथ हुई। सलामी ग्रहण करने के पश्चात श्री मनोज कुमार ने परेड का सूक्ष्म निरीक्षण किया तथा अधिकारी-कर्मचारियों के अनुशासन, वेशभूषा एवं टर्नआउट का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान उत्कृष्ट टर्नआउट एवं अनुशासित प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। इसके उपरांत पुलिस लाइन स्थित सामुदायिक भवन में अधिकारी एवं कर्मचारियों का *दरबार (सैनिक सम्मेलन)* आयोजित किया गया। सम्मेलन के दौरान पुलिस उप महानिरीक्षक महोदय ने अधिकारी-कर्मचारियों की व्यक्तिगत, पारिवारिक एवं सेवा संबंधी समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा उनके त्वरित निराकरण हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश प्रदान किए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में कार्यरत मैदानी स्तर के कर्मचारियों को विभिन्न प्रकार की चुनौतियों एवं समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सैनिक सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की समस्याओं को समझना एवं उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली किसी भी समस्या का समाधान संवाद एवं सकारात्मक चर्चा के माध्यम से खोजा जा सकता है। सम्मेलन के दौरान पुलिस उप महानिरीक्षक महोदय ने पुलिस कर्मियों को विभाग द्वारा संचालित *विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, सैलरी पैकेज, स्वास्थ्य सुविधाओं* एवं अन्य लाभों की जानकारी प्रदान की तथा उनका अधिकतम लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। साथ ही पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी एवं जनोन्मुखी बनाने के लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों से सुझाव भी प्राप्त किए। बढ़ते साइबर अपराधों पर उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। पुलिसकर्मियों को अपने थाना क्षेत्र, परिवार एवं समाज में लोगों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना चाहिए, जिससे आमजन *साइबर ठगी एवं ऑनलाइन धोखाधड़ी* से सुरक्षित रह सकें। उन्होंने साइबर जागरूकता को जन अभियान के रूप में संचालित करने पर बल दिया। झाबुआ जिले की सामाजिक एवं भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि झाबुआ एक *आदिवासी बाहुल्य* जिला है, जहां साक्षरता दर अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों का दायित्व और अधिक बढ़ जाता है कि वे आमजन से जमीनी स्तर पर जुड़कर उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता एवं शालीनता के साथ सुनें तथा उनका त्वरित समाधान करें। इससे जनता का पुलिस के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत होगा तथा अनावश्यक परेशानियों से लोगों को राहत मिलेगी। अपने उद्बोधन के दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान का उल्लेख करते हुए सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आगामी वर्षा ऋतु में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है तथा हरित, स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण के निर्माण हेतु प्रत्येक व्यक्ति को सक्रिय योगदान देना चाहिए। कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक झाबुआ श्री देवेंद्र पाटीदार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक झाबुआ श्री प्रतिपाल सिंह महोबिया, एसडीओपी झाबुआ श्री कमलेश शर्मा, एसडीओपी थांदला श्री राजेश सूलिया, एसडीओपी पेटलावद सुश्री अनुरक्ति सबनानी, रक्षित निरीक्षक श्री अखिलेश राय सहित जिले के समस्त थाना प्रभारी एवं अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। सैनिक सम्मेलन एवं वार्षिक निरीक्षण के पश्चात पुलिस उप महानिरीक्षक महोदय ने एसडीओपी कार्यालय झाबुआ, थाना कोतवाली एवं पुलिस अधीक्षक कार्यालय झाबुआ का निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्यालयीन व्यवस्थाओं, अभिलेखों के संधारण, लंबित प्रकरणों की स्थिति, कानून-व्यवस्था संबंधी तैयारियों एवं पुलिस कार्यप्रणाली की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। इसके अतिरिक्त उन्होंने प्रस्तावित नवीन पुलिस अधीक्षक कार्यालय भवन के निर्माण संबंधी नक्शे एवं ले-आउट का अवलोकन कर भवन की उपयोगिता, कार्यकुशलता एवं भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को आवश्यक मार्गदर्शन एवं सुझाव प्रदान किए। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के नए भवन निर्माण के नक्शे व ले आउट का निरीक्षण कर मार्गदर्शन प्रदान किया। झाबुआ पुलिस द्वारा आयोजित यह वार्षिक निरीक्षण एवं सैनिक सम्मेलन पुलिस बल के मनोबल को सुदृढ़ करने, कार्यक्षमता में वृद्धि करने तथा जनसेवा के प्रति पुलिस की प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ।