झाबुआ

एक एक चोट इंसान के मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है – साध्वी आशा श्री जी

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झाबुआ ।  जैन स्थानकवासी संप्रदाय की साध्वी आशा श्री जी अपने संयम, तप और त्यागमय जीवन के माध्यम से आत्मकल्याण की साधना में निरंतर अग्रसर हैं। 29 वर्ष की आयु में सांसारिक सुख-सुविधाओं और भौतिकवादी जीवन का त्याग कर उन्होंने संयम मार्ग को अपनाया था। वर्तमान में वे तप, स्वाध्याय, साधना और त्याग के माध्यम से कर्मों की निर्जरा कर आध्यात्मिक उन्नति के पथ पर अग्रसर हैं । आचार्य प्रवर पूज्य गुरुदेव श्री उमेश मुनि जी महाराज साहब अणु के पावन मुखारविंद से आज से ठीक 16 वर्ष पूर्व मोहनखेड़ा जैन तीर्थ पर 29 वर्ष की आयु में 15 जून 2010 को दीक्षित हुई । झाबुआ गौरव साध्वी पूज्या आशाश्री जी महाराज साहब के 16 वे पावन दीक्षा दिवस के मंगल प्रसंग पर मेन रोड स्थित वर्धमान जैन स्थानक भवन पर आयोजित विशाल धर्मसभा मै साध्वी पूज्या मुक्तिप्रभाजी म. सा. ने संयम को श्रेष्ठ बताया । आपने एक सुंदर दृष्टांत के माध्यम से संयम के विशेष महत्व पर प्रकाश डाला । पूज्या महासती जी ने साध्वी आशा श्री जी के दीक्षा पर्याय के 16 वर्ष पूर्ण होने पर झाबुआ गौरव पूज्या आशाश्री जी के उत्कृष्ट संयम साधना की मंगल कामना की और उन्हें शुभाशीष प्रदान किया । साथ ही पूज्या साध्वी आशाश्री जी के सांसारिक परिवारजनों को धन्यवाद दिया | झाबुआ गौरव साध्वी पूज्या आशाश्री जी महाराज साहब ने बड़े ही प्रसन्न भाव के साथ धर्मसभा में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज मेरे सौभाग्य का उदय हुआ है कि मेरे दीक्षा दिवस के शुभ प्रसंग पर परम विदुषी पूज्या महासती मुक्तिप्रभा जी महाराज साहब पाट को सुशोभित कर रहे हैं, मैं उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती हूं | साध्वी आशाश्री जी ने आगे कहा कि एक-एक चोट इंसान के मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है| साध्वी आशाश्री ने स्वयं के सांसारिक जीवन में लगी उन छोटी -छोटी चोटो को विस्तार से बताया, जिससे उनका संयम का मार्ग प्रशस्त हुआ और आज तक निर्बाध गति से संयम मार्ग में वे आगे बढ़ रही है । 16 वें दीक्षा वर्ष पर साध्वी आशा श्री ने साझा किए वैराग्य के प्रेरक प्रसंग जैन स्थानकवासी संप्रदाय की साध्वी आशा श्री जी के 16 वें दीक्षा वर्ष के उपलक्ष्य में उनके संयम जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। झाबुआ निवासी कैलाश श्रीमाल की पुत्री आशा श्री ने मुनि भगवंत उमेश मुनि जी की प्रेरणा से सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम पथ को अपनाया था। दीक्षा से पूर्व उनके जीवन में वैराग्य के अनेक आध्यात्मिक संकेत प्राप्त हुए, जिन्होंने उन्हें धर्म साधना की ओर अग्रसर किया।
जानकारी के अनुसार, साध्वी पूज्या कान्तीलताजी महाराज सा. झाबुआ प्रवास के दौरान गोचरी (आहार) के लिए उनके निवास पर पधारी थीं । उस दौरान साध्वी श्री के पातरे से दूध छलक गया था। धार्मिक मान्यताओं में इसे शुभ संकेत माना जाता है। आशा श्री के अनुसार, यह उनके जीवन में दीक्षा की दिशा में प्राप्त पहला महत्वपूर्ण संकेत था । इसके बाद आचार्य भगवंत उमेश मुनि जी झाबुआ प्रवास के दौरान उनके निवास पर पधारे और मांगलिक सुनाई । इस घटना ने उनके मन में आध्यात्मिक चेतना और वैराग्य भाव को और अधिक दृढ़ किया। वैराग्य की भावना को और बल तब मिला, जब बारावाला संप्रदाय के एकांतर तपस्वी मुनि श्री मुकेश जी महाराज झाबुआ प्रवास के दौरान उनके घर पधारे और उन्हें संयम एवं दीक्षा मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी। यह प्रेरणा उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।
इसके बाद झाबुआ श्रीसंघ द्वारा आचार्य उमेश मुनि जी के घोटी वर्षावास के दौरान किया गया पत्राचार दीक्षा प्रक्रिया का निर्णायक आधार बना। संतों के सान्निध्य, प्रेरणा और आध्यात्मिक संकेतों ने आशा श्री के मन में संयम जीवन के प्रति दृढ़ संकल्प उत्पन्न किया और उन्होंने सांसारिक मोह-माया का त्याग कर दीक्षा ग्रहण कर धर्म साधना का मार्ग अपना लिया। झाबुआ गौरव साध्वी आशाश्री जी ने उनके वैराग्य को पल्लवित करने वाले उन समस्त महापुरुषों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की | उनके वैराग्य काल में सहयोगी बने सभी उनके सांसारिक परिवार जनों और झाबुआ श्री संघ के श्रावक श्रविकाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की ।

दीक्षा लेना अचंभित करने वाला निर्णय था सभा में साध्वी आशा श्री जी के सांसारिक भाई आशीष श्रीमाल ने बताया कि साध्वी आशा श्री जी का दीक्षा लेना बड़ा अचंभित करने वाला निर्णय था चूंकि साध्वी श्री की दीक्षा के पूर्व उन्हें होली खेलने का बहुत शौक था अपने भाई बहन , सहेली व अन्य पारिवारिक जनो के साथ मजाक मस्ती करना उन्हें पसंद था । पारिवारिक कार्यक्रमो में सम्मिलित होने का भी शौक था । इस तरह हसते हंसाते रहने वाली आशा का दीक्षा लेना अचंभित करने वाला था । आशीष ने यह भी बताया कि दीक्षा के पूर्व आशा ने उन सभी शौक को पूरा किया था । तत्पश्चात निश्चितता के साथ संयम पथ पर अग्रसर हुई । दीक्षा दिवस के मंगल प्रसंग पर प्रातः 8:15 से 8:45 तक नमस्कार महामंत्र के जाप का आयोजन हुआ | जाप के पश्चात 8:45 से 10 :15 तक धर्मसभा का आयोजन हुआ, जिसमें प्रवचन के पश्चात वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किये | अभिव्यक्ति के क्रम में आशीष श्रीमाल, संजय मेहता एवं अन्य वक्ताओ ने अपने विचार व्यक्त किये | आयोजन में विशेष रूप से उपस्थित अणु बहु मंडल ने एक सुंदर स्तवन प्रस्तुत कीया | चंदना बहू मंडल पेटलावद के द्वारा भी स्तवन प्रस्तुत किया गया | सभा का संचालन श्री संघ अध्यक्ष प्रदीप रुनवाल ने किया । । 16 वें दीक्षा वर्ष के अवसर पर समाजजनों ने साध्वी आशा श्री जी के त्याग, तप और संयममय जीवन को प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन की मंगलकामनाएं व्यक्त की ।

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