झाबुआ

मौत का इंतज़ार कर रहा बिजली विभाग!
6 महीने से अधूरे पड़े बिजली पोल, ठेकेदार गायब, विभाग मौन

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झाबुआ। जिले के ग्राम गढ़वाड़ा में बिजली विभाग और ठेकेदार की कथित लापरवाही ने ग्रामीणों को भय और आक्रोश के माहौल में जीने को मजबूर कर दिया है। अनास नदी के पास आईटीआई कॉलेज के सामने एवं वरुण पेट्रोल पंप के पीछे पिछले छह महीनों से विद्युत लाइन का कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। नए पोल लगाए गए, लेकिन उन पर केबल नहीं डाली गई। नतीजा यह है कि क्षेत्र के लोग हर दिन संभावित हादसे के साये में जीवन बिता रहे हैं।
आधा काम, पूरा खतरा
जानकारी के अनुसार यहां छह नए रेल पोल लगाए जाने थे, लेकिन केवल चार पोल लगाकर काम अधूरा छोड़ दिया गया। पुराने जर्जर पोल और झुके हुए तार आज भी बिजली आपूर्ति का आधार बने हुए हैं। कई स्थानों पर बिजली के तार जमीन के बेहद करीब लटक रहे हैं, जिससे बच्चों, राहगीरों और मवेशियों की जान पर खतरा मंडरा रहा है।
लकड़ी के सहारे चल रही बिजली व्यवस्था
स्थिति इतनी गंभीर है कि एक स्थान पर बिजली के तारों को लकड़ी के सहारे टिकाकर रखा गया है। तेज हवा चलने पर तार आपस में टकराते हैं और शॉर्ट सर्किट की चिंगारियां निकलती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
बच्चों और मवेशियों की जान जोखिम में
स्थानीय निवासी मनोज अरोड़ा, शंकर एवं दीपक भूरिया ने बताया कि यह क्षेत्र खुला मैदान होने के कारण बच्चे यहां खेलते हैं तथा मवेशियों का भी लगातार आवागमन रहता है। नीचे लटकते तार किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकते हैं।
उपकरण जल रहे, जिम्मेदार सो रहे
आईटीआई कॉलेज के कर्मचारी आवासों में रहने वाले लोगों का आरोप है कि बार-बार फाल्ट होने से टीवी, मिक्सर सहित कई घरेलू उपकरण खराब हो चुके हैं। लगातार हो रहे नुकसान के बावजूद विभाग द्वारा कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा।
भुगतान हो गया, काम अधूरा क्यों?
विभाग के कुछ कर्मचारियों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि संबंधित ठेकेदार का भुगतान हो चुका है, जिसके बाद उसने कार्य अधूरा छोड़ दिया। यदि यह आरोप सही है तो सवाल उठता है कि भुगतान के बाद भी अधूरा काम छोड़ने वाले ठेकेदार पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अब तक मौन क्यों हैं?
हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन?
वरुण पेट्रोल पंप संचालक मनोज अरोड़ा ने बताया कि हवा चलने पर तार अक्सर नीचे गिर जाते हैं और कभी भी बड़ी जनहानि हो सकती है। उन्होंने मांग की है कि नए पोलों पर तत्काल केबल डाली जाए तथा जर्जर ट्रांसफार्मर को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।
अधिकारी ने नहीं उठाया फोन
मामले में विद्युत कंपनी के अधिकारी महेंद्र सिंह पवार से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कई बार कॉल करने के बावजूद फोन रिसीव नहीं किया। ऐसे में विभाग का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
बड़ा सवाल
क्या बिजली विभाग किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा?
क्या अधूरे कार्य का भुगतान करने वालों की जवाबदेही तय होगी?
और क्या ग्रामीणों की सुरक्षा से बढ़कर भी कोई प्राथमिकता है?
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत करने के साथ आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। फिलहाल गढ़वाड़ा के लोग पूछ रहे हैं — “हादसा होने का इंतज़ार किसे है, ठेकेदार को या विभाग को?”

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