झाबुआ। देश में आपातकाल का वह काला दौर आज भी लोकतंत्र प्रेमियों के मन को झकझोर देता है, जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पहरे बिठा दिए गए थे और लोकतंत्र की आवाज को दबाने का प्रयास किया गया था। ऐसे कठिन समय में जिन्होंने जेल की सलाखों के पीछे रहकर भी लोकतंत्र की मशाल बुझने नहीं दी, वे मीसा बंदी आज भी समाज के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।
इसी भावना के साथ झाबुआ में लोकतंत्र सेनानी एवं मीसा बंदी रहे श्री विमल कांठी एवं श्री कनकमल कटकानी का भावपूर्ण सम्मान किया गया। शाल एवं श्रीफल भेंट कर उनका अभिनंदन किया गया तथा उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र वातावरण में अपने विचार व्यक्त कर पा रहे हैं, उसके पीछे उन लोकतंत्र सेनानियों का त्याग, संघर्ष और बलिदान है जिन्होंने आपातकाल के दौरान यातनाएं सहकर भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनके संघर्ष ने देश को तानाशाही की बेड़ियों से मुक्त कर लोकतंत्र को नई ऊर्जा प्रदान की।
सम्मान समारोह के दौरान मीसा बंदियों ने आपातकाल के दिनों के अपने अनुभव साझा किए और युवा पीढ़ी से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सदैव सजग रहने का आह्वान किया। उपस्थित कार्यकर्ताओं ने उन्हें लोकतंत्र का जीवंत इतिहास बताते हुए उनके संघर्ष को नमन किया।
लोकतंत्र के इन सच्चे प्रहरीयों के सम्मान का यह अवसर केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस संघर्ष और बलिदान को याद करने का भावपूर्ण प्रयास था जिसने भारत के लोकतंत्र को मजबूत और जीवंत बनाए रखा।
कार्यक्रम में भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष अंकुर पाठक, मंडल महामंत्री जुवान सिंह गुंडिया, मंडल महामंत्री राजेश थापा, एनजीओ प्रकोष्ठ जिला संयोजक मनोज अरोरा, पार्षद रेखा शर्मा, पूर्व जिला महामंत्री संगीता पलासिया, मंडल उपाध्यक्ष जितेंद्र पांचाल, राकेश कटारा सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।